बजट और इकनॉमिक सर्वे से जुड़े 10 कठिन शब्द, इनका मतलब जानकर समझ जाएंगे पूरी ABCD

Union Budget 2026: केंद्र सरकार 1 फरवरी को बजट पेश करने जा रही है, ऐसे में इस आम बजट से जुड़े कई ऐसे शब्द हैं, जिनका मतलब आम आदमी को पता नहीं होता है. ऐसे में आज हम आपको ऐसे 10 शब्दों का मतलब बता रहे हैं.

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बजट से जुड़े इन कठिन शब्दों का मतलब जानते हैं आप?

Union Budget 2026: देश का आम बजट 1 फरवरी को पेश होने जा रहा है, जिसका करोड़ों देशवासी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. बजट से पहले 'इकोनॉमिक सर्वे 2026' पेश किया गया है, जिसमें उन तमाम चीजों की जानकारी होती है, जिनसे ये पता चलता है कि देश किस दिशा में जा रहा है. पिछला और आने वाला साल कैसा रहेगा, ये भी इस आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है. बजट में आम आदमी को सिर्फ इस बात से मतलब होता है कि उनके लिए क्या सस्ता हुआ है और कौन सी सुविधाएं मिली हैं. बजट से जुड़े कई ऐसे शब्द होते हैं, जिनके बारे में लोग काफी कम जानते हैं. आज हम आपको ऐसे 10 शब्दों का मतलब बता रहे हैं, जिनसे आप बजट की ABCD को अच्छी तरह समझ सकते हैं. 

1. केंद्रीय बजट (Union Budget) 

सबसे पहले केंद्रीय बजट की बात करते हैं कि ये आखिर होता क्या है. सरकार हर साल तमाम चीजों का हिसाब-किताब देती है, इसमें अलग-अलग क्षेत्र में हुए खर्चे, योजनाएं, भविष्य का प्लान और बाकी तमाम चीजें होती हैं. सरकार बताती है कि पैसा कहां से आएगा और किन सेक्टर्स में खर्च किया जाएगा. 

2. मुद्रास्फीति (Inflation)

आसान भाषा में कहें तो मुद्रास्फीति का मतलब महंगाई से होता है. इसमें पैसे की ताकत कम हो जाती है और समय से साथ चीजों के दाम बढ़ने लगते हैं. इसे ऐसे समझ सकते हैं कि जो सामान 100 रुपये का है, उसकी कीमत एक साल में 110 हो गई. 

3. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)

सरकार की कमाई के मुकाबले खर्चा कितना है, इसे मापने के पैमाने को राजकोषीय घाटा कहा जाता है. कमाई के मुकाबले जितना ज्यादा खर्च हो रहा है, उसके बीच के गैप को ही फिसकल डेफिसिट कहते हैं. इसे पूरा करने के लिए सरकार कर्ज लेती है. ये आय और व्यय के बीच का अंतर होता है.  

4. जीडीपी (Gross Domestic Product) 

देश की अर्थव्यवस्था का हाल बताने वाले पैमाने को जीडीपी यानी ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट या सकल घरेलू उत्पाद कहा जाता है. इसमें देश के अंदर होने वाले उत्पादन को मापा जाता है. एक साल में कुल कितना सामान बना और कितनी सेवाएं दी गईं, इन सभी को मिलाकर जीडीपी दर तय की जाती है. किसी भी देश की बढ़ती जीडीपी उसकी अच्छी आर्थिक स्थिति को बताने का संकेत है.  

5. प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) 

डायरेक्ट टैक्स या फिर प्रत्यक्ष कर वो टैक्स होता है, जो लोगों की कमाई से सीधे सरकार को मिलता है. इस टैक्स को किसी दूसरे पर टाला नहीं जा सकता है. इसमें इनकम टैक्स और कॉर्पोरेट टैक्स शामिल होता है. ये टैक्स देने वाली की आय या फिर संपत्ति पर आधारित होता है. 

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6. अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax)

इनडायरेक्ट टैक्य या फिर अप्रत्यक्ष कर वो होता है, जो आप सरकार को सीधे तौर पर नहीं देते हैं. ये टैक्स आप रोजमर्रा की चीजों के दाम के साथ सरकार को देते हैं. जब आप किसी दुकान से एक बिस्किट का पैकेट खरीदते हैं तो उसकी कीमत में कुछ हिस्सा टैक्स का भी होता है, जो सरकार की जेब में जाता है. 

7. राजस्व व्यय (Revenue Expenditure)

रोजमर्रा के कामों पर होने वाले सरकार के खर्चे को राजस्व व्यय कहा जाता है. इसमें सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सैलरी और पेंशन जैसी चीजें शामिल होती हैं. 

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8. पूंजीगत परिसंपत्ति (Capital Asset)

जब भी कोई व्यक्ति मूल्यवान वस्तु खरीदता है, जिनमें- घर, जमीन, मशीनरी, बॉन्ड या फिर कोई दूसरी चीज शामिल होती है तो इसे कैपिटल एसेट या फिर पूंजीगत परिसंपत्ति कहा जाता है. ये निवेश वाली ऐसी चीजें होती हैं, जिन्हें भविष्य में आय के स्रोत के तौर पर रखा जाता है. ऐसी चीजों पर कैपिटल गेन टैक्स लगाया जा सकता है. 

9. वित्त विधेयक (Finance Bill) 

बजट में टैक्स से जुड़े जो बदलाव किए जाते हैं, उन्हें लागू करने के लिए सरकार की तरफ से प्रस्ताव पेश होता है. इसे वित्त विधेयक या फिर फाइनेंस बिल कहा जाता है. 

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10. विनिवेश (Disinvestment)

जब सरकार की तरफ से अपने अधीन आने वाली किसी कंपनी या फिर संस्था की हिस्सेदारी बेची जाती है तो इसे विनिवेश कहा जाता है. आमतौर पर सरकार पैसा जुटाने के लिए ऐसा करती है. इससे सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ कुछ हद तक कम किया जाता है. 

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