UGC Equality Rules 2026 : अगर आप कॉलेज स्टूडेंट हैं या जल्द ही यूनिवर्सिटी जाने वाले हैं, तो यूजीसी का नया नियम आपके लिए जानना बेहद जरूरी है. यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 से देश के सभी कॉलेजों के लिए 'समानता' के नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं. इन नियमों का मकसद कैंपस में किसी भी छात्र के साथ होने वाले भेदभाव को जड़ से खत्म करना है, लेकिन इन्हीं नियमों के कुछ पॉइंट्स पर अब बवाल शुरू हो गया है.
क्या हैं नए नियम?
अब जाति, धर्म, लिंग और जन्मस्थान के साथ-साथ दिव्यांगता (विकलांगता) को भी भेदभाव का बड़ा आधार माना गया है. यानी अगर किसी दिव्यांग छात्र के साथ कैंपस में कोई बुरा बर्ताव होता है, तो उसे अब एक गंभीर अपराध माना जाएगा.
आपको बता दें कि पहले भेदभाव की शिकायतों पर फैसला लेना संस्थानों के विवेक पर निर्भर होता था, लेकिन अब यूजीसी ने 'भेदभावपूर्ण व्यवहार' की एक लंबी लिस्ट जारी की है. अगर कोई भी संस्थान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से SC/ST या OBC छात्र के साथ भेदभाव करता पाया गया, तो उस पर कठोर कार्रवाई होगी.
कमेटियों में 50% आरक्षण का दांव नए नियमों के तहत अब हर कॉलेज में एक 'इक्विटी समिति' बनेगी. दिग्विजय सिंह वाली संसदीय समिति की सिफारिश पर अब इस 10 सदस्यीय कमेटी में आधे से ज्यादा (50%) सदस्य SC, ST और OBC वर्ग से होंगे.
साथ ही, अब हर कॉलेज को हर साल एक सार्वजनिक रिपोर्ट देनी होगी कि उनके यहां भेदभाव के कितने मामले आए और उन पर क्या एक्शन लिया गया. हालांकि, इन नियमों के खिलाफ सोशल मीडिया पर #RollbackUGC का ट्रेंड चल पड़ा है. विरोध करने वालों का आरोप है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को 'संभावित अपराधी' की तरह पेश कर रहे हैं, जिसे वे 'यूजीसी का काला कानून' कह रहे हैं.