यूनिवर्सिटी कैंपस में जातिगत भेदभाव में भारी बढ़ोतरी, UGC ने यही रिपोर्ट देखकर बनाए नए नियम

UGC Anti Discrimination Rules: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की तरफ से दलितों और पिछड़े वर्ग के छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए नए नियम बनाए गए हैं, इन्हें लेकर अब विरोध हो रहा है और सवर्ण छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं.

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UGC के नए नियम पर बवाल

UGC Equity Regulations 2026: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन यानी यूजीसी के नए नियमों को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकने और बराबरी के लिए यूजीसी ने ये नियम लागू किए हैं. हालांकि इन्हें लेकर जनरल कैटेगरी यानी सवर्ण छात्र गुस्से में हैं और आरोप लगा रहे हैं कि यूजीसी का ये नया नियम सवर्णों के खिलाफ है. ऐसे में इस बात की भी चर्चा हो रही है कि आखिर शिक्षण संस्थानों में दलितों या फिर एससी-एसटी छात्रों के साथ कितना भेदभाव होता है और ये पिछले कुछ सालों में कितना बढ़ चुका है. इसे लेकर यूजीसी की तरफ से एक रिपोर्ट जारी की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट में भी सौंपा गया. 

जातिगत भेदभाव के आंकड़े 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की तरफ से  जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों में पिछले कुछ सालों में भारी बढ़ोतरी हुई है. इसमें बताया गया था कि जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतें साल 2017-18 के 173 मामलों से बढ़कर 2023-24 में 378 हो गई थीं, यानी ऐसे मामलों में 118.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यही वजह है कि अब इसे लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं. 

क्या है यूजीसी का नया नियम?

भारत में चलने वाली तमाम यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों को यूजीसी की तरफ से मान्यता दी जाती है. इनमें होने वाली अनियमितताओं पर भी यूजीसी की नजर रहती है. ऐसे में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया गया. ये कमेटी पिछड़े वर्ग और दलित छात्रों की शिकायतों को सुनेगी और एक तय समय में उनका निपटारा करेगी. 

सभी कॉलेजों के लिए ये कमेटी बनाना जरूरी होगा. इस कमेटी का काम कैंपस में बराबरी का माहौल बनाना और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए बनी योजनाओं को लागू करना होगा. हर कमेटी में एससी-एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिलाओं का होना जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट की तरफ से यूजीसी को ये निर्देश दिया गया था, जिसके बाद ये नया नियम लागू किया गया है. 

क्यों हो रहा विवाद?

यूजीसी के इस नए नियम के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है. इसमें कहा गया है कि नए नियम से भेदभाव कम नहीं बल्कि ज्यादा हो जाएगा, खासतौर पर सर्वणों के साथ अन्याय हो सकता है. नियमों का फायदा उठाकर कुछ छात्र सर्वण छात्रों को निशाना बना सकते हैं. इसमें यूजीसी अधिनियम का हवाला भी दिया जा रहा है और कहा जा रहा है कि ये उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की भावना के खिलाफ है. 

जातिगत भेदभाव की परिभाषा

यूनिवर्सिटी या कॉलेज में जाति आधारित भेदभाव को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को शामिल किया गया है. इसमें प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष और अपमानजनक व्यवहार को भी शामिल किया गया है जो किसी छात्र की गरिमा या शिक्षा में समानता को कम करता है. किसी को नीचा दिखाने या फिर भेदभाव करने पर उसकी शिकायत कमेटी को की जा सकती है और ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं. 

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