रांची के BIT मेसरा को सुप्रीम कोर्ट का झटका, छात्र की मौत के मामले में माता-पिता को देना होगा 20 लाख का मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने बीआईटी मेसरा के छात्र राजा पासवान की मौत मामले में झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दिए गए 20 लाख रुपये मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा और संस्थान को दो हफ्ते में भुगतान का निर्देश दिया.

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बीआईटी मेसरी की विशेष अनुमति याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित
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  • सुप्रीम कोर्ट का झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए BIT मेसरा को बीस लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश
  • बीआईटी मेसरा को मुआवजा भुगतान के लिए दो सप्ताह की मोहलत दी गई है, अगली सुनवाई मार्च में होगी
  • छात्र राजा पासवान की मौत एक फ्रेशर पार्टी के दौरान हुई मारपीट और संस्थान की लापरवाही के कारण हुई थी
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रांची:

सुप्रीम कोर्ट ने रांची स्थित शैक्षणिक संस्थान बीआईटी मेसरा को अपने एक छात्र राजा पासवान की मौत के मामले में उसके माता-पिता को 20 लाख रुपए का मुआवजा देने का झारखंड हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा है. शीर्ष अदालत ने बीआईटी मेसरा को इस आदेश के पालन के लिए दो सप्ताह का समय दिया है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली बीआईटी मेसरी की विशेष अनुमति याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया.

संस्थान को मोहलत; मामला ‘फ्रेशर पार्टी' में मारपीट से मौत का

सुनवाई के दौरान संस्थान के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि यदि कुछ समय दिया जाए तो बीआईटी मेसरा हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए मुआवजा राशि का भुगतान कर देगा. कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए भुगतान के लिए दो सप्ताह की मोहलत दी और मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 के लिए तय की है. यह पूरा मामला 14 नवंबर 2024 का है, जब बीआईटी मेसरा पॉलिटेक्निक के तीसरे सेमेस्टर के छात्र राजा पासवान के साथ एक 'फ्रेशर पार्टी' के दौरान कथित तौर पर मारपीट की गई थी.

हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियां: लापरवाही, देरी और सुरक्षा खामियां

इस घटना में राजा गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसे बाद में रिम्स में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी. झारखंड हाईकोर्ट ने 12 अगस्त 2025 को अपने फैसले में संस्थान को लापरवाही और संस्थागत खामियों का दोषी पाया था. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि छात्र की मौत के पीछे संस्थान की गंभीर चूक थी. अदालत ने पाया कि घायल छात्र को समय पर इलाज मुहैया कराने में देरी की गई, पुलिस को सूचना देने में कोताही बरती गई और कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद लचर थी.

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CCTV बंद, पोस्टमार्टम में चोटें; ‘टॉर्टियस लायबिलिटी' पर जिम्मेदारी

यहां तक कि परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी काम नहीं कर रहे थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उन शुरुआती दावों को भी खारिज कर दिया था जिनमें कहा गया था कि छात्र की हालत शराब के सेवन के कारण बिगड़ी थी. रिपोर्ट में शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे. अदालत ने 'टॉर्टियस लायबिलिटी' के सिद्धांत के तहत संस्थान को जिम्मेदार ठहराते हुए अंतरिम मुआवजे का आदेश दिया था.

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