इस वक्त हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जमाने में चल रहे हैं. एआई ने काम करने की टेक्नोलॉजी को बहुत आसान कर दिया है. साथ ही यह नौकरी के कई अवसर भी लेकर आया है. हालांकि, व्यक्तिगत तौर पर इसके कुछ नुकसान भी हैं, लेकिन इसके मिस यूज के खिलाफ साइबर लॉ काम कर रहा है. अगर स्कूल और कॉलेज में एआई टेक्नोलॉजी का विस्तार जल्द से जल्द किया जाए, तो छात्रों के लिए यह टेक्नोलॉजी वरदान साबित हो सकती है. एआई कितने काम का है और इससे छात्र क्या-क्या फायदा उठा सकते हैं, इस पर अमेरिकन टेक्नोलॉजी कंपनी एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग ने अहम बातें शेयर की हैं. एआई के इस्तेमाल से जुड़ी इन महत्वपूर्ण बातों पर सबको खासकर छात्रों को ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह आज छात्र होते तो इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर कैसे खुद को अपग्रेड करते.
AI से क्या सीखना चाहिए?
एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग ने साफतौर पर कहा कि अगर वे आज के समय में स्टूडेंट होते, तो वे कोडिंग नहीं, बल्कि एआई सीखने को प्राथमिकता देते. उन्होंने कहा कि उनका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि कोडिंग बेकार है. उनका मानना है कि स्टूडेंट्स को पहले ChatGPT जैसे एआई टूल के साथ काम करना सीखना चाहिए.
उन्हें यह समझना चाहिए कि एआई का यूज करके वे बेहतर वकील, डॉक्टर, रसायनज्ञ और इंजीनियर कैसे बन सकते हैं. उन्होंने आगे कहा, एआई से बातचीत करना और उसे सीखना, उस व्यक्ति के लिए बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है, जो सवाल पूछने में माहिर है. जेन्सेन मानते हैं कि किसी को भी प्रेरित करने के लिए कलात्मकता में एक्सपर्ट होना जरूरी है.
शिक्षा में एआई का महत्व
एआई के जरिए छात्र बहुत कुछ कर सकते हैं. व्यक्तिगत तौर पर एडेप्टेड पाथ, ऑटोमेटिव एडमिनिस्ट्रेटिव टास्क के जरिए ग्रेडिंग, चैटबोट्स टूटोरियल, नोट्स, कंटेंट बनाना और शिक्षा से जुड़ते सकते हैं. इंटेलीजेंस टूटोरिंग सिस्टम के तहत 24/7 सपोर्ट, रियल टाइम फीडबैक, इंस्टेंट एक्स्पेलेनेशन और पर्सनल ट्यूटर मिलने में आसानी होती है. वहीं, ऑटोमेटेड एडमिनिस्ट्रेटिव के जरिए ग्रेडिंग, अटेंडेंस, शेड्यूलिंग और एनरोलमेंट हैंडल करने के साथ-साथ टीचर्स का वर्कलोड भी कम हो जाता है.
एआई एक तरह से टीचर और छात्र के लिए एक रिसर्चर की तरह काम करता है. इसमें वो आइडियाज सुझाता है और बड़े डेटासेट को एनालाइज करता है. इसमें लर्निंग पैटर्न्स, ट्रैक प्रोग्रेस और डेटा ड्राइवन सर्कुलर बनाने में भी मदद करता है. कहना गलत नहीं होगा कि अगर छात्र एआई का सही तरीके से इस्तेमाल करें तो वो बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं.