दूसरे देश की भाषा सीखो और विदेश में नौकरी पाओ, सरकार खोलेगी 30 नए लैंग्वेज सेंटर

सरकार युवाओं के लिए भाषा को एक नई स्किल के रूप में मान्यता देने की तैयारी कर रही है. इसके तहत 30 नए भाषा केंद्र खोले जाएंगे. जहां इंग्लिश, जापानी और जर्मन सिखाई जाएगी. मकसद है युवाओं को देश और विदेश में बेहतर नौकरी के मौके दिलाना.

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विदेश में नौकरी करने का मौका

नौकरी पाने के लिए युवा कितने जतन करते हैं. कुछ हायर एजुकेशन में जोर लगाते हैं तो कुछ स्किल्स डेवलप करते हैं. आप भी नौकरी के लिए तमाम कोशिशें कर रहे हैं तो जरा मल्टी लिंगुअल होने के बारे में भी सोचना शुरू कर दीजिए. वैसे भी अब सिर्फ डिग्री और तकनीकी स्किल होना ही काफी नहीं है. बल्कि सही भाषा बोलना और समझना भी नौकरी के लिए बहुत जरूरी हो गया है. खासकर अगर कोई युवा अब्रॉड में काम करना चाहता है. तब उस देश की भाषा या किसी खास लेंग्वेज का आना फायदेमंद हो सकता है.

इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार एक नई योजना पर काम कर रही है. स्किल डेवलेपमेंट मिनिस्ट्री अब भाषा को भी एक जरूरी स्किल के रूप में मान्यता देने की तैयारी में है. ताकि युवाओं को देश और विदेश दोनों जगह अच्छे काम के मौके मिल सकें.

30 नए लेंग्वेज सेंटर और नई तैयारी

सरकार देश में करीब 30 नए लेंग्वेज सेंटर खोलने जा रही है. ये केंद्र इंडिया इंटरनेशनल स्किल सेंटर्स के तहत चलेंगे. यहां युवाओं को इंग्लिश, जापानी और जर्मन जैसी भाषाएं सिखाई जाएंगी. इन सेंटर्स में वही युवा आएंगे जो विदेश में नौकरी करने की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे युवा भी यहां से ट्रेनिंग हासिल कर सकते हैं जो भाषा के दम पर किसी अच्छी कंपनी में नौकरी करना चाहते हैं.

पहले से चल रहे IISC सेंटर्स में ट्रेनिंग, सर्टिफिकेट और विदेश जाने से पहले की पूरी जानकारी दी जाती है. अब इसमें भाषा सीखना भी जरूरी हिस्सा बनेगा. सरकार चाहती है कि भाषा सीखना सिर्फ शौक ही बनकर न रह जाए. बल्कि नौकरी हासिल करने का एक प्रॉमिसिंग जरिया भी माना जाए. इस स्किल की मदद से युवाओं को अलग अलग राज्यों सहित दूसरे देशों में काम ढूंढने में आसानी होगी.

फॉरन स्टैंडर्ड के हिसाब से होगी ट्रेनिंग

नई नीति में भाषा सीखने के अलग अलग स्तर तय किए जाएंगे. ताकि सबको पता हो कि किसका लेवल क्या है. ये सिस्टम नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क से जुड़ा होगा. यानी भाषा सीखने की स्किल को सरकारी एक्नॉलेजमेंट भी मिलेगा. सरकार ये भी चाहती है कि भारत में सीखी गई भाषाओं को विदेशों में भी मान्यता मिले. इसके लिए ट्रेनिंग को इंटरनेशनल सिस्टम जैसे CEFR से जोड़ा जाएगा. ऐसा करने से उन युवाओं को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो दूसरे देशों में नौकरी करने के ख्वाहिशमंद हैं. सही भाषा सीख कर वो मनचाही कंट्री में काम पाने की कोशिश कर सकते हैं.

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