40 हजार छात्रों के लिए सौर ऊर्जा से पक रही है खिचड़ी! सिलेंडर की किल्लत का निकाला तोड़

फाउंडेशन के अनुसार, रोजाना 20 से 25 कमर्शियल सिलेंडरों की बचत हो रही है. यह मॉडल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद फायदेमंद है. अगर होटल, कैंटीन और बड़े कम्युनिटी किचन इस तकनीक को अपनाएं, तो गैस की बढ़ती कीमतों और किल्लत से बड़ी राहत मिल सकती है.

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सौर ऊर्जा से पक रही है हजारों बच्चों की खिचड़ी

गैस संकट के बीच छत्रपति संभाजीनगर से एक क्रांतिकारी और प्रेरक खबर सामने आई है. इस्कॉन के ‘अन्नामृत फाउंडेशन' ने सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर गैस की निर्भरता को लगभग खत्म कर दिया है. संभाजीनगर के चिकलठाणा IT पार्क में अन्नामृत फाउंडेशन का मेगा किचन संचालित हो रहा है. यहां पहले रोजाना 25 कमर्शियल गैस सिलेंडर की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब केवल 2 सिलेंडरों की मदद से 40,000 विद्यार्थियों का पौष्टिक भोजन तैयार किया जा रहा है. यहां 25 किलोवाट का सोलर यूनिट लगाया गया है, जो भाप पैदा करता है. दो बड़े स्टीम बॉयलर और 600 किलो क्षमता वाले 7 जैकेटेड कुकर की मदद से हजारों लीटर भोजन केवल भाप के सहारे पक जाता है.

25 सिलेंडर का काम अब सिर्फ 2 में

सौर ऊर्जा को प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने के लिए विशेष इन्सुलेटर तकनीक का प्रयोग किया गया है. फाउंडेशन शहर के 168 स्कूलों के 38 हजार छात्रों और 80 बालवाड़ियों के करीब 3500 बच्चों तक रोजाना ताजा भोजन पहुंचाता है. पहले गैस खत्म होने के डर से बच्चों का खाना रुक जाने की चिंता रहती थी, लेकिन अब सूरज की रोशनी से यह समस्या स्थायी रूप से हल हो गई है. अब यहां एलपीजी का उपयोग केवल तड़का लगाने या पानी उबालने जैसे छोटे कामों तक सीमित रह गया है.

फाउंडेशन के अनुसार, रोजाना 20 से 25 कमर्शियल सिलेंडरों की बचत हो रही है. यह मॉडल न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद फायदेमंद है. अगर होटल, कैंटीन और बड़े कम्युनिटी किचन इस तकनीक को अपनाएं, तो गैस की बढ़ती कीमतों और किल्लत से बड़ी राहत मिल सकती है.

MOHSIN SHEIKH की रिपोर्ट

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