- PM मोदी ने 'परीक्षा पे चर्चा 2026' में छात्रों से गेमिंग को करियर बनाने का सुझाव दिया.
- मोदी ने कहा कि भारत की लोककथाओं और पंचतंत्र पर आधारित गेम विकसित करना युवाओं के लिए एक अच्छा अवसर हो सकता है.
- प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन गेमिंग के दुरुपयोग, जुआ और लत से दूर रहने की सलाह दी और सरकार के कानूनों का जिक्र किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘परीक्षा पे चर्चा 2026' के 9वें संस्करण में देशभर के छात्रों से संवाद किया. कई राज्यों से आए बच्चों ने पढ़ाई, तनाव, मोबाइल और गेमिंग जैसे सवाल पूछे. इसी दौरान एक छात्र ने सवाल किया, 'सर, मुझे गेमिंग में बहुत दिलचस्पी है, लेकिन लोग टोकते हैं… मैं क्या करूं?'
PM मोदी का जवाब: गेमिंग को करियर बनाओ, लेकिन गलत रास्ते से बचो
प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर कहा भारत के पास अनगिनत कहानियां हैं. पंचतंत्र, लोककथाएं. जिन पर शानदार गेम बनाए जा सकते हैं. आप अपना सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाइए, एक-दो गेम खुद बनाइए और लॉन्च कीजिए. गेमिंग में रुचि अच्छी बात है. यह एक स्किल है. इसमें स्पीड, रिएक्शन, क्रिएटिविटी सब होती है.
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साथ ही पीएम मोदी ने बच्चों को हिदायत दी कि ऑनलाइन गेमिंग के दुरुपयोग से बचें. जुआ और गलत तरह की ऑनलाइन लत से दूर रहिए… सरकार ने इस पर कानून भी बनाए हैं. पीएम मोदी ने कहा कि जब आपके घरवाले देखेंगे कि आप सही दिशा में जा रहे हैं, तो वे भी आपके मिशन का हिस्सा बन जाएंगे.
लेकिन क्यों जरूरी है गेमिंग का जिम्मेदार होना?
बीते दिनों उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से बेहद दर्दनाक मामला सामने आया, जहां तीन नाबालिग बहनों ने नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली. शुरुआती जांच में पाया गया कि वे ऑनलाइन कोरियन गेमिंग और K‑culture की अत्यधिक लत में थीं. बहनें 12, 14 और 16 साल की थीं. कमरे से मिला 8 पन्नों का ‘सॉरी पापा' वाला सुसाइड नोट, जिसमें कोरियन गेम, K‑drama, K‑pop और ऑनलाइन दुनिया में खो जाने का ज़िक्र था. पुलिस के मुताबिक, वे कई साल से स्कूल नहीं जा रही थीं और लगभग पूरा समय मोबाइल और गेमिंग में बिताती थीं.
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गाजियाबाद में गेम बना मौत की वजह?
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि वे 'कोरियन प्रिंसेस' जैसी काल्पनिक दुनिया में जीने लगी थीं.
यह मामला इस बात का उदाहरण है कि बिना निगरानी वाली ऑनलाइन गेमिंग किस तरह बच्चों को मानसिक रूप से अलग-थलग कर सकती है.
PM मोदी की सलाह का महत्व इसी कारण और बढ़ जाता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि गेमिंग को टैलेंट और स्किल की तरह अपनाइए, लेकिन लत, जुआ, हिंसक या जोखिम भरे गेम्स से दूर रहिए और यह सलाह बिल्कुल सही समय पर आई है, क्योंकि गाजियाबाद जैसे मामलों ने दिखा दिया है कि बच्चों को गेमिंग की स्वतंत्रता होनी चाहिए, लेकिन माता‑पिता की डिजिटल मॉनिटरिंग और संवाद जरूरी है और बच्चों के लिए मेंटल हेल्थ पर ध्यान देना भी उतना ही अहम है.