Republic Day 2026: क्या है 'बीटिंग रिट्रीट' और क्यों इसके बिना अधूरा है गणतंत्र दिवस? जानें सबकुछ

अगर आपने कभी टीवी पर डूबते सूरज के बीच सेना के बैंड्स को धुन बजाते और राष्ट्रपति भवन को रोशनी से नहाते देखा है, तो समझ लीजिए वही बीटिंग रिट्रीट है. ऐसे में आइए समझते हैं कि आखिर ये प्रोग्राम है क्या और क्यों ये इतना खास है.

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बीटिंग रिट्रीट सिर्फ एक गाना-बजाना नहीं है, बल्कि यह हमारी सेना के अनुशासन, एकता और ताकत का प्रतीक है.

Beating retreat history : हर साल जब 26 जनवरी की परेड खत्म होती है, तो लोगों को लगता है कि गणतंत्र दिवस का जश्न पूरा हो गया. लेकिन असल में, इस उत्सव का आधिकारिक समापन 29 जनवरी को होता है. इस दिन दिल्ली के विजय चौक पर एक बेहद शानदार प्रोग्राम होता है जिसे 'बीटिंग रिट्रीट' (Beating Retreat) कहते हैं. अगर आपने कभी टीवी पर डूबते सूरज के बीच सेना के बैंड्स को धुन बजाते और राष्ट्रपति भवन को रोशनी से नहाते देखा है, तो समझ लीजिए वही बीटिंग रिट्रीट है. ऐसे में आइए आसान शब्दों में समझते हैं 'बीटिंग रिट्रीट' सेरेमनी क्या है और इसमें क्या-क्या होता है.

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क्या होता है बीटिंग रिट्रीट?

दरअसल, बीटिंग रिट्रीट एक सैन्य परंपरा है. इसमें हमारी थल सेना (Army), जल सेना (Navy) और वायु सेना (Air Force) के बैंड हिस्सा लेते हैं. ये जवान अपनी खास यूनिफॉर्म में कदमताल करते हुए देशभक्ति की ऐसी धुनें बजाते हैं कि सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो जाएं.

इस कार्यक्रम का सबसे भावुक पल वो होता है जब सूरज ढलने के समय पूरे सम्मान के साथ तिरंगे को नीचे उतारा जाता है. इसके बाद राष्ट्रपति की इजाजत लेकर सेनाएं अपने बैरक (कैंप) में वापस लौट जाती हैं. जो इस बात का संकेत है कि अब गणतंत्र दिवस का समारोह खत्म हो गया है.

बीटिंग रिट्रीट की शुरूआत कब से हुई

बीटिंग रिट्रीट की कहानी सदियों पुरानी है. पुराने जमाने में जब युद्ध होते थे, तो सूर्यास्त के बाद लड़ाई रोक दी जाती थी. उस समय ढोल बजाकर (Beating the drums) सैनिकों को वापस बुलाने का संकेत दिया जाता था. सैनिक जैसे ही ये आवाज सुनते थे, वे युद्ध का मैदान छोड़कर अपने कैंपों की तरफ लौट जाते थे. भारत ने इस परंपरा को अपनी सेना का हिस्सा बनाया और 1950 के दशक से यह हमारे गणतंत्र दिवस के समापन का मुख्य जरिया बन गया.

बीटिंग रिट्रीट की हाईलाइट्सकदमताल और धुनें

सेना के बैंड 'सारे जहां से अच्छा' और 'कदम-कदम बढ़ाए जा' जैसी धुनें बजाते हैं, जिन्हें सुनकर हर हिंदुस्तानी का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है.

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लाइट शो

जैसे ही अंधेरा होता है, रायसीना हिल्स पर स्थित राष्ट्रपति भवन और आस-पास की इमारतें हजारों लाइटों से जगमगा उठती हैं. यह नजारा देखने लायक होता है.

मुख्य अतिथि कौन होता है?

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देश के राष्ट्रपति होते हैं, जो अपनी खास बग्गी या काफिले के साथ वहां पहुंचते हैं.  इसके अलावा समारोह में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहते हैं. 

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क्यों जरूरी है यह प्रोग्राम?

बीटिंग रिट्रीट सिर्फ एक गाना-बजाना नहीं है, बल्कि यह हमारी सेना के अनुशासन, एकता और ताकत का प्रतीक है. यह हमें याद दिलाता है कि भले ही उत्सव खत्म हो गया हो, लेकिन हमारी सरहदों पर तैनात जवान हमेशा चौकन्ने हैं.

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