Rajasthan Board 12th Result 2026 Out : राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों, तो सफलता कदम चूमती है. इस साल की मेरिट लिस्ट में सीकर के शेखावाटी स्कूल की छात्रा दिव्या भादू ने अपनी चमक बिखेरी है. विज्ञान (PCB) स्ट्रीम में प्रदेश का नाम रोशन करने वाली दिव्या की कहानी केवल अंकों की नहीं, बल्कि अनुशासन और ऊंचे सपनों की है.
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हॉस्टल में रहकर बुना सफलता का ताना-बाना
दिव्या अपनी पढ़ाई को धार देने के लिए उन्होंने घर के आराम को त्यागकर सीकर के शेखावाटी स्कूल के हॉस्टल को अपना ठिकाना बनाया. दिव्या बताती हैं कि हॉस्टल के अनुशासित माहौल ने उन्हें भटकाव से दूर रखा और उनका पूरा ध्यान केवल किताबों पर केंद्रित रहा.
'सेल्फ स्टडी' है दिव्या का सक्सेस मंत्र
आज के दौर में जहां छात्र भारी-भरकम कोचिंग और ट्यूशन के जाल में उलझे रहते हैं, वहीं दिव्या ने 'सेल्फ स्टडी' को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया. दिव्या का मानना है कि स्कूल में जो पढ़ाया जाए, उसे खुद से पढ़ना सबसे जरूरी है.
दिव्या की यात्रा यहीं खत्म नहीं होती. विज्ञान की छात्रा होने के बावजूद उनका दिल समाज सेवा और प्रशासन में धड़कता है. दिव्या का सपना डॉक्टर बनना नहीं, बल्कि एक IAS ऑफिसर बनकर देश की सेवा करना है.
शेखावाटी एजुकेशन ग्रुप के चेयरमैन बीएल रणवां ने बताया कि विद्यालय की छात्रा दिव्या भादू ने 500 में से 499 अंक हासिल कर संपूर्ण राजस्थान में टॉप कर शेखावाटी स्कूल का नाम रोशन किया है. उन्होंने बताया कि 12वीं कला और साइंस के परीक्षा परिणाम में 95 प्रतिशत से ऊपर 106 और 90 प्रतिशत से ऊपर 264 विद्यार्थियों ने अंकअर्जित कर शानदार परीक्षा परिणाम दिया है. बोर्ड परीक्षा परिणाम में शानदार सफलता हासिल करने पर विद्यालय में बधाइयां देने वालों का तांता लगा रहा.
बता दें दिव्या सुदूर बाड़मेर जिले के सीमावर्ती छोटे से गांव धनाऊ की रहने वाली हैं. छात्रा के पिता सूजाराम सहायक ग्राम सेवक हैं जबकि माता द्रोपदी देवी गृहिणी हैं. दोनों ने अपने संस्कारों और मूल्यों से बेटी को निरंतर प्रेरणा दी. पिछले दो वर्षों से सीकर में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाली इस छात्रा ने अपनी 10 वीं की शिक्षा भी बाड़मेर जिले में ही पूरी की.
यह उपलब्धि न सिर्फ परिवार के लिए बल्कि पूरे धनाऊ गांव और बाड़मेर जिले के लिए गर्व का विषय है. इस सफलता की कहानी उन हजारों ग्रामीण छात्र-छात्राओं को प्रेरणा देगी जिनके पास संसाधन कम हैं, लेकिन हौसले बुलंद हैं.यह साबित करता है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों, अगर इरादे मजबूत और मेहनत सच्ची हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है.