PMRC Scheme: भारत के काम आएगा देश से बाहर गया टैलेंट, सरकार ने बनाया ये खास प्लान

सरकार प्राइम मिनिस्टर रिसर्च चेयर स्कीम लाने की तैयारी में है, जिसके तहत अगले 5 साल में 120 भारतीय वैज्ञानिकों को विदेशों से वापस IITs से जोड़ा जाएगा. इसका मकसद AI, सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी जैसे अहम सेक्टरों में भारत की रिसर्च ताकत बढ़ाना है.

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प्राइम मिनिस्टर रिसर्च चेयर स्कीम (PMRC)

PM Research Chair Scheme: भारत अब अपने टैलेंट को वापस बुलाने की तैयारी में है. जो भारतीय साइंटिस्ट और रिसर्चर सालों से विदेशों में काम कर रहे हैं, उन्हें अब IIT जैसे बड़े संस्थानों में काम करने का मौका मिलने वाला है. इसके लिए केंद्र सरकार एक नई योजना पर काम कर रही है, जिसका नाम प्राइम मिनिस्टर रिसर्च चेयर स्कीम (PMRC) है. इस स्कीम का मकसद देश की रिसर्च और पढ़ाई को और मजबूत बनाना, विदेशी यूनिवर्सिटीज में काम कर रहे इंडियन ब्रेन्स को वापस लाना है. आइए जानते हैं इस स्कीम की पूरी डिटेल्स. 

पीएम रिसर्च चेयर स्कीम क्या है 

PMRC स्कीम के तहत सरकार अगले 5 साल में 120 भारतीय वैज्ञानिकों और रिसर्चरों को IITs से जोड़ेगी. यह जानकारी हाल ही में हुई IIT काउंसिल की बैठक में दी गई, जो IITs की सबसे बड़ी फैसले लेने वाली बॉडी है. सरकार का फोकस उन भारतीय वैज्ञानिकों पर है, जो विदेशों में टॉप यूनिवर्सिटी या रिसर्च लैब में काम कर रहे हैं. AI, सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी जैसे फील्ड में एक्सपर्ट हैं.

कितने लोगों को मिलेगा मौका

इस स्कीम के तहत 120 लोगों को तीन कैटेगरी में चुना जाएगा पहला यंग रिसर्च फेलो (Young Research Fellows), जो रिसर्च की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. दूसरा सीनियर रिसर्च फेलो (Senior Research Fellows), जिनके पास अच्छा अनुभव और मजबूत रिसर्च बैकग्राउंड है और तीसरा रिसर्च चेयर (Research Chairs), जो अपने फील्ड के बड़े नाम हैं और टीम लीड कर सकते हैं. इन सभी को अलग-अलग IITs में काम करने का मौका मिलेगा.

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किन फील्ड्स पर रहेगा खास फोकस

PMRC स्कीम सिर्फ नाम की नहीं, बल्कि देश की जरूरत के हिसाब से बनाई जा रही है. इसमें 14 अहम सेक्टर शामिल किए गए हैं, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, एडवांस्ड मटेरियल, नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशन शामिल हैं. इसका मतलब साफ है कि भविष्य की टेक्नोलॉजी भारत में ही बने.

PMRC स्कीम से सरकार क्या करना चाहती है

इस स्कीम से सरकार तीन बड़े टारगेट पूरे करना चाहती है. पहला IITs में रिसर्च की ताकत बढ़ाना, दूसरा नए आइडिया और इनोवेशन को बढ़ावा देना और तीसरा दुनिया में भारत की पहचान एक मजबूत रिसर्च हब के रूप में बनाना. सरकार ने संकेत दिए हैं कि यह स्कीम जल्द ही बड़े लेवल पर लॉन्च की जाएगी.

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IIT से पढ़े स्टूडेंट्स पर भी होगी स्टडी

IIT काउंसिल ने एक और अहम फैसला लिया है. अब 2013, 2014 और 2015 में पास आउट हुए IIT स्टूडेंट्स पर एक बड़ा सर्वे किया जाएगा. इस सर्वे से पता लगाया जाएगा कि आईआईटी से पढ़ने के बाद स्टूडेंट्स कहां पहुंचे, समाज और देश को क्या फायदा हुआ, कितने लोग विदेश चले गए और क्यों. इस काम की जिम्मेदारी IIT बॉम्बे को दी गई है. काउंसिल ने यह भी माना कि कई IIT ग्रेजुएट्स PhD और पोस्ट-डॉक के लिए विदेश जा रहे हैं, क्योंकि भारत में रिसर्च के रास्ते उतने मजबूत नहीं हैं. अब इस पर भी स्टडी होगी और कोशिश की जाएगी कि भारत में ही बेहतर रिसर्च मौके मिले, जिससे टैलेंट देश में रुकेंगे. 

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