पढ़ाई में कमजोर बच्चों से दोस्ती क्यों है जरूरी, पीएम मोदी ने छात्रों को बताई ये कमाल की टेक्निक

Pariksha Pe Charcha: पीएम मोदी ने छात्रों को टिप्स देते हुए कहा, "अनुशासन और मोटिवेशन ये दोनों ही जीवन में महत्वपूर्ण हैं. अगर अनुशासन ही नहीं है, तो कितना भी इंस्पिरेशन हो, वो किसी काम नहीं आएगा. जीवन में अनुशासन बहुत अनिवार्य है. ये इंस्पिरेशन में 'सोने पर सुहागा' का काम करता है। अगर अनुशासन ही नहीं है, तो कितना ही इंस्पिरेशन हो, वो बोझ बन जाता है और निराशा पैदा करता है."

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परीक्षा पे चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने बच्चों को कई अहम टिप्स दी.

Pariksha Pe Charcha कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने स्कूलों बच्चों से बात की और उन्हें एग्जाम से जुड़ी कई तरह की टिप्स दी. साथ ही पीएम मोदी ने बच्चों से कहा, आपकी क्लास में जो बच्चे पढ़ने में थोड़े कमजोर हैं, उन्हें अपना दोस्त बनाइए. ये टेक्निक आपके बहुत काम आएगी. उसे कहिए कि आज मैं तुम्हें मैथ सिखाना चाहता हूं, उसे सिखाने के लिए आप जो दिमाग इस्तेमाल करेंगे, उससे आपका विषय मजबूत होगा और आपको परीक्षा में फायदा होगा.

'परीक्षा पे चर्चा' के दूसरे एपिसोड की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस बार कार्यक्रम कुछ अलग और खास है. बहुत सारे छात्रों ने मुझे ये सुझाव भेजा था कि देश के अलग अलग हिस्सों में भी परीक्षा पे चर्चा होनी चाहिए. तो इस बार मैंने देश के अलग अलग हिस्सों में भी छात्रों के साथ बैठकर 'परीक्षा पे चर्चा' की. इसी क्रम में पीएम मोदी ने सबसे पहले तमिलनाडु के कोयंबटूर के छात्रों से चर्चा की.

छोटा स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं

सबसे पहले कोयंबटूर के छात्रों से चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "मैं कई सालों से 'परीक्षा पे चर्चा' के जरिए क्लास 10 से 12 तक के छात्रों से बातचीत कर रहा हूं. मैं उनसे सीखने के लिए बात करता हूं. जब भी मैं लोगों से मिलता हूं, तो वे स्टार्टअप्स के बारे में बात करते हैं." उन्होने कहा कि सबसे पहले आपको (छात्रों को) पता होना चाहिए कि आप क्या करना चाहते हैं. उदाहरण के लिए कुछ स्टार्टअप टेक्नोलॉजी पर फोकस करते हैं. अगर आपके दोस्त अलग-अलग फील्ड में एक्सपर्ट हैं, तो आप उनके साथ एक छोटा स्टार्टअप शुरू कर सकते हैं.

पीएम मोदी ने छात्रों को टिप्स देते हुए कहा, "अनुशासन और मोटिवेशन ये दोनों ही जीवन में महत्वपूर्ण हैं. अगर अनुशासन ही नहीं है, तो कितना भी इंस्पिरेशन हो, वो किसी काम नहीं आएगा. जीवन में अनुशासन बहुत अनिवार्य है. ये इंस्पिरेशन में 'सोने पर सुहागा' का काम करता है। अगर अनुशासन ही नहीं है, तो कितना ही इंस्पिरेशन हो, वो बोझ बन जाता है और निराशा पैदा करता है."

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