केरल के स्कूल में अब नहीं होंगे बैकबेंचर्स, बैग का वजन भी होगा कम; प्रस्ताव को मिली मंजूरी

केरल सरकार ने छात्रों के हित में स्कूल शिक्षा से जुड़े अहम सुधारों का प्रस्ताव रखा है. इसमें स्कूल बैग का वजन कम करने और कक्षाओं में ‘बैकबेंचर’ की सोच को खत्म करने की बात शामिल है.

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केरल में एजुकेशन रिफॉर्म

केरल के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक अच्छी खबर है. राज्य सरकार ने स्कूल बैग का वजन कम करने और क्लास में सबसे पीछे बैठने वाले बच्चों को ‘बैकबेंचर' बोलने की सोच को खत्म करने का प्रस्ताव तैयार किया है. इसका मकसद बच्चों को फिजिकली और मेंटली ज्यादा खुश और सहज बनाना है. सरकार चाहती है कि स्कूल ऐसी जगह बनें जहां हर बच्चा बराबरी महसूस करें और बिना दबाव के सीख सके. इस प्रस्ताव को अगले सेशन से लागू करने की योजना है और उससे पहले जनता से सुझाव मांगे गए हैं.

स्कूल बैग का वजन कम करने की योजना

अक्सर देखा जाता है कि छोटे छोटे बच्चे जरूरत से ज्यादा भारी बैग लेकर स्कूल जाते हैं, जिससे उनकी सेहत पर असर पड़ता है. इसी समस्या को देखते हुए केरल सरकार ने स्कूल बैग का वजन कम करने का प्रस्ताव रखा है. शिक्षा मंत्री वी. सिवनकुट्टी के अनुसार बच्चों की खुशी और हेल्थ को ध्यान में रखते हुए ये कदम जरूरी है. कम वजन वाले बैग से बच्चों को पीठ दर्द और थकान जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी.

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 ‘बैकबेंचर' की सोच खत्म करने की पहल

इस प्रस्ताव का एक अहम हिस्सा क्लास में आगे और पीछे बैठने के भेदभाव को खत्म करना है. अक्सर पीछे बैठने वाले बच्चों को कम ध्यान देने वाला या कमजोर छात्र मान लिया जाता है. सरकार चाहती है कि कक्षा का माहौल ऐसा हो कि सब बराबर फील करें. जहां हर बच्चा बराबर भागीदारी महसूस करे. इससे बच्चों का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और सीखने में उनका इंटरेस्ट भी.

SCERT की भूमिका और विशेषज्ञों की राय

इस पूरे प्रस्ताव को तैयार करने में राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने अहम भूमिका निभाई है. एजुकेशन एक्सपर्ट से सलाह लेकर एक ड्राफ्ट रिपोर्ट बनाई गई. जिसे राज्य पाठ्यक्रम संचालन समिति ने मंजूरी दी है. ये सुनिश्चित किया गया है कि सुझाव प्रेक्टिकल और स्कूलों में लागू करने योग्य हों.

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जनता से सुझाव और आगे का प्रोसेस

सरकार ने इस ड्राफ्ट रिपोर्ट पर जनता से राय मांगी है. टीचर्स, माता-पिता, छात्र और आम लोग 20 जनवरी तक SCERT की वेबसाइट पर अपने सुझाव दे सकते हैं. इन सुझावों को ध्यान में रखकर आखिरी फैसला लिया जाएगा. सरकार का टारगेट है कि आने वाले शैक्षणिक सत्र से केरल के स्कूल बच्चों के लिए ज्यादा दोस्ताना, समान और हेल्पफुल बन सकें.

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