JNU Violence: दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी को पढ़ाई के अलावा तमाम मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए भी जाना जाता है. देश में हुए कई बड़े आंदोलनों में जेएनयू के छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. हालांकि यूनिवर्सिटी विवादों के चलते भी खूब चर्चा में रही है. अब एक बार फिर यहां अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और लेफ्ट संगठनों के बीच हिंसक झड़प हुई है, जिसमें कई छात्र घायल हो गए. ये पहली बार नहीं है जब जेएनयू में ऐसा कुछ हुआ हो, इससे पहले भी कई बार यूनिवर्सिटी में इस तरह का हंगामा मचा है. करीब 5 साल पहले जेएनयू में इसी तरह की हिंसा हुई थी, जिसमें कुछ नकाबपोश अंदर घुसे और छात्रों के साथ जमकर मारपीट हुई.
क्या है ताजा मामला?
इस मामले की शुरुआत JNU की कुलपति शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित के एक बयान से हुई, उनके एक पॉडकास्ट में यूजीसी नियमों को लेकर दिए गए कुछ बयानों को लेफ्ट दलों ने जातिवादी बताया. इसके बाद छात्र संघ पदाधिकारियों के सस्पेंशन ने मामले को और ज्यादा बढ़ा दिया और पूरा जेएनयू सुलगने लगा. इसे लेकर जेएनयू छात्र संघ की तरफ से एक बड़ा मार्च बुलाया गया और इसी दौरान ABVP और लेफ्ट के छात्र आपस में भिड़ गए.
जेएनयू में 2020 जैसी हिंसा
जेएनयू में हुई इस ताजा हिंसा के मामले ने 2020 में हुई हिंसा की याद दिलाई है. इस दौरान भी कुछ नकाबपोश देर रात कैंपस में घुस गए थे और जमकर हिंसा हुई थी. 5 जनवरी 2020 को जेएनयू के साबरमती और पेरियार हॉस्टल में ये हिंसा हुई थी. इसमें तत्कालीन JNUSU अध्यक्ष समेत 28 छात्र घायल हुए थे. इस दौरान भी कई वीडियो और तस्वीरें सामने आई थीं, जिनमें हाथों में डंडे और रॉड लिए नकाबपोश दिखाई दिए. ये हिंसा जेएनयू में फीस बढ़ोतरी को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच हुई थी.
JNU में हिंसा की पूरी टाइमलाइन
- 1983 के दौर में जेएनयू में खूब हिंसा हुई, जिसके बाद पूरी यूनिवर्सिटी को बंद किया गया और छात्रों को जबरन हॉस्टलों से निकाला गया.
- साल 2000 में जेएनयू में देश विरोधी नज्मों को लेकर खूब बवाल हुआ. वामपंथी दलों पर आरोप लगाया गया कि सेना के जवानों से भी इस दौरान मारपीट हुई.
- 2005 में तत्तकालीन पीएम मनमोहन सिंह के जेएनयू दौरे को लेकर खूब बवाल हुआ और उन्हें काले झंडे दिखाए गए. ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देने के विरोध में ये सब हुआ.
- साल 2016 में देश विरोधी नारों के चलते जेएनयू एक बार फिर चर्चा में आया. आरोप लगा कि आतंकी अफजल गुरु के समर्थन में नारे लगाए गए और इस मामले के चलते कैंपस में खूब हिंसा हुई. बाद में कई छात्रों को गिरफ्तार भी किया गया.
- 2019 में यूनिवर्सिटी की तरफ से कुछ नियम लाए गए, जिनमें फीस बढ़ोतरी और ड्रेस कोड जैसी चीजें थीं. इसे लेकर जेएनयू छात्रसंघ ने जमकर विरोध किया और कई दिनों तक हंगामा चलता रहा.
- 2020 में एनआरसी और सीएए को लेकर भी कैंपस का माहौल गर्म रहा, इस दौरान भी कई बार लेफ्ट और एबीवीपी के छात्र आमने-सामने नजर आए.
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