JNU की VC शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने ऐसा क्या कहा, जिस पर मच गया बवाल? पढ़ लीजिए पूरा बयान

दलित और अश्वेत  लोग हमेशा 'विक्टिम' (पीड़ित) बनकर या 'विक्टिम कार्ड' खेलकर आगे नहीं बढ़ सकते. ये ड्रग्स से ज्यादा खतरनाक है, लगातार ये बताते रहो कि सामने दुश्मन है और तुम उस पर चिल्लाते रहो, जिससे तुम्हें अच्छा फील होगा.

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NU VC शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के 'विक्टिम कार्ड' वाले बयान पर विवाद शुरू हो गया है. छात्र संगठनों ने इसे जातिवादी बताते हुए इस्तीफे की मांग की है.

JNU VC controversy : जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई प्रोटेस्ट नहीं बल्कि यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर (VC) शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित का एक बयान है. VC ने  हाल ही में एक पॉडकास्ट में यूजीसी नियमों पर दिए एक बयान को 'जातिवादी' बताते हुए छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया. इसको लेकर जेएनयू कैंपस में देर रात अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और लेफ्ट संगठनों के बीच हिंसक झड़प भी हुई है, जिसमें कई छात्र घायल हो गए. ऐसे में आइए जानते हैं आखिर जवाहर लाल नेहरु की वाइस चांसलर ने ऐसा क्या कह दिया जिससे मामला इतना बढ़ गया.

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल,पूरा विवाद 16 फरवरी को रिलीज हुए एक पॉडकास्ट से शुरू हुआ. इस पॉडकास्ट में VC शांतिश्री UGC के '2026 इक्विटी (एंटी-डिस्क्रीमिनेशन) रेगुलेशन' पर चर्चा कर रही थीं. बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि इसे काफी सीक्रेट तरीके से किया गया. यहां तक कि हमें भी पता नहीं चला कि इसमें क्या लिखा गया है. आप किसी एक ग्रुप को पावर देकर और दूसरे को न्याय देने से इनकार नहीं कर सकते हैं. 

उन्होंने आगे कहा कि दलित और अश्वेत  लोग हमेशा 'विक्टिम' (पीड़ित) बनकर या 'विक्टिम कार्ड' खेलकर आगे नहीं बढ़ सकते. ये ड्रग्स से ज्यादा खतरनाक है, लगातार ये बताते रहो कि सामने दुश्मन है और तुम उस पर चिल्लाते रहो, जिससे तुम्हें अच्छा फील होगा. ये सब असलियत नहीं है, सिर्फ काल्पनिक दुनिया बनाने की कोशिश हो रही है. 

मुझे लगता है कि हर कोई लड़ाई लड़ रहा है. एक ब्राह्मण भी बहुत गरीब परिवार से आ सकता है. हमें हर किसी के लिए और हर किसी के हक के लिए लड़ना होगा. ये आपके जन्म से मिली पहचान पर निर्भर नहीं हो सकता है. ये चीज अलोकतांत्रिक है.

छात्रों का आरोप - यह 'जातिवादी' सोच है

JNU छात्र संघ (JNUSU) ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की है. छात्रों का कहना है कि VC की यह बातें उनकी जातिवादी मानसिकता को दर्शाती हैं. यूनियन का आरोप है कि इस तरह की बयानबाजी यूनिवर्सिटी जैसे सार्वजनिक स्थानों पर दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव और अन्याय को बढ़ावा देती है.

VC की सफाई- मेरी बात का गलत मतलब निकाला गया

विवाद बढ़ता देख VC शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने अपनी सफाई पेश की है. उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है. उन्होंने तर्क दिया कि वह खुद एक 'बहुजन' परिवार से आती हैं, इसलिए वह ऐसी बात क्यों करेंगी?

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उनका कहना है कि वह 'वोक' (Woke) कल्चर और उसके विरोधियों के विचारों के बारे में बात कर रही थीं. UGC के नियमों पर उन्होंने कहा कि इन नियमों को लेकर लोगों के मन में कई शंकाएं हैं और शायद इन्हें बनाने में उतनी सावधानी नहीं बरती गई जितनी जरूरत थी.

आखिर क्या हैं ये UGC रेगुलेशंस?

UGC के 2026 इक्विटी नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति और अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए थे. हालांकि,कड़े विरोध के बाद फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी है.

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