VC का इस्तीफा और रोहित एक्ट की मांग, JNU में प्रदर्शन कर रहे वामपंथी छात्र क्या चाहते हैं?

JNUSU Protest: जेएनयू में पिछले कुछ दिनों से लगातार प्रदर्शन और मार्च निकाले जा रहे हैं. छात्र संघ यूनिवर्सिटी की वीसी के बयान के बाद उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है. इसके अलावा रोहित एक्ट लागू करने की भी बात कही जा रही है.

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JNU में लगातार हो रहे हैं प्रदर्शन

JNUSU Protest: दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी यानी JNU में पिछले कुछ दिनों से बवाल जारी है. यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के यूजीसी नियमों पर दिए एक बयान के बाद से यहां छात्र संगठन लगातार मार्च निकाल रहा है और प्रदर्शन जारी हैं. ऐसे में एक बार फिर यूजीसी के नए नियमों की चर्चा शुरू हो गई है और जेएनयू के छात्र रोहित एक्ट लाने की मांग कर रहे हैं. इस पूरे मामले को समझने के लिए हमने जेएनयू में हो रहे प्रदर्शन में मुख्य भूमिका निभा रहे पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष एन साईं बालाजी से बातचीत की. इस बातचीत में उन्होंने बताया कि वामपंथी छात्र संगठन आखिर क्यों रोहित एक्ट और वीसी के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. 

रोहित एक्ट क्या है?

JNUSU के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष और AISA के पूर्व प्रेसिडेंट एन साई बालाजी ने बताया कि वो रोहित एक्ट लाने की मांग क्यों कर रहे हैं. उन्होंने कहा, रोहित वेमुला की मौत के बाद हम लोगों की मांग थी कि रिजर्वेशन से लोग कैंपस में आए हैं, लेकिन कैंपस के अंदर उनके साथ न्याय कैसे होगा. रोहित से लेकर पायल तडवी की मौतों ने इस सच्चाई को बाहर लाने का काम किया. जातिवादी भेदभाव को लेकर कैंपस के अंदर मैकेनिज्म होना जरूरी है. यहीं से रोहित एक्ट की कल्पना आई थी. इसे लेकर काफी लंबा सिलसिला चला. जिसमें एक्ट का ड्राफ्ट से लेकर इस पर डिसकशन जैसी चीजें शामिल थीं. कर्नाटक में भी कैंपेन फॉर रोहित चलाया गया और इसका ड्राफ्ट भी जारी हुआ. 

सरकार ने मानी थी भेदभाव की बात

एन साई बालाजी ने कहा कि केंद्र सरकार ने भी ये माना कि कैंपस में जाति के आधार पर भेदभाव होता है. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी आंकड़ा दिया गया और यूजीसी ने नए नियम जारी किए. मामला ये है कि अगर आप कोई चीज लाए हैं तो ये हाफ कुक्ड नहीं होनी चाहिए. जेएनयू की वीसी ने दलितों को लेकर जैसा बयान दिया है, अगर ऐसे लोगों को कमेटी में शामिल किया जाएगा तो क्या होगा. हम लोगों ने भले ही क्रिटिसाइज किया था, लेकिन ये भी माना था कि सरकार ने इस बात को स्वीकार किया है. 

"सरकार ने इस तरह का नियम बनाया कि  कोर्ट को उसे खारिज करना पड़ा. सरकार समाजिक न्याय की मलाई भी खाना चाहते हैं और जाति के आधार पर जो उन्हें वोट मिलते हैं, उसे भी बचाना चाहते हैं. जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने यूजीसी नियमों को डिफेंड किया था तो उनके खिलाफ कई टिप्पणी की गई. इसके बावजूद सरकार ने इसे लेकर कुछ नहीं कहा."

लगातार जारी रहेगा प्रदर्शन

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष ने बताया कि आगे प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि हम कुलपति के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. उन्होंने अपनी सोच दिखाते हुए कहा कि दलित विक्टिमहुड से जूझ रहे हैं और वो ड्रग की तरह इसे चला रहे हैं. इसे लेकर एजुकेशन मिनिस्ट्री से लेकर यूजीसी और किसी भी राजनीतिक दल ने कुछ नहीं कहा. जब आप किसी चीज पर चुप रहते हैं तो इसका मतलब आप उस बयान को बढ़ावा दे रहे हैं. एक तरफ आप कहते हैं कि जाति खत्म होनी चाहिए, जो हम भी मानते हैं. वहीं कुलपति जाति के आधार पर इस तरह का बयान दे रहे हैं तो हम लोग कैसे चुप रह सकते हैं. 

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तमाम पदाधिकारी हुए गिरफ्तार

जेएनयू में प्रदर्शन के बीच पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए छात्रों को गेट पर ही रोक दिया. इसके बाद कुछ छात्रों के साथ पुलिस की झड़प भी हो गई, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं. इस प्रदर्शन को लीड करने वाले JNUSU के कई पदाधिकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है. कई घंटों की हिरासत के बाद जेएनयू (JNU) के 14 छात्रों को तिहाड़ जेल भेज दिया गया है. पटियाला हाउस कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद इन्हें जेल भेजा गया. इनमें जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) की अध्यक्ष अदिति, उपाध्यक्ष गोपिका, संयुक्त सचिव दानिश, पूर्व अध्यक्ष नीतीश और आयसा (AISA) की अखिल भारतीय अध्यक्ष नेहा भी शामिल हैं. 

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