JEE Main Twin Brothers: इंजीनियरिंग के लिए होने वाली JEE Main परीक्षा का रिजल्ट हाल ही में जारी हुआ, इसमें कुल 12 ऐसे छात्र थे, जिन्होंने 100 परसेंटाइल अंक हासिल किए हैं. वहीं कुछ छात्र ऐसे भी हैं, जिनकी खूब चर्चा हुई. कोटा में पढ़ रहे दो जुड़वा भाइयों महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान की कहानी भी खूब वायरल हो रही है, क्योंकि दोनों ने एक जैसा स्कोर हासिल किया है. अब इनमें से एक भाई का वीडियो सोशल मीडिया पर कई लोग शेयर कर रहे हैं, जिसमें वो अपना फ्यूचर प्लान बताता हुआ दिख रहा है. इस दौरान वो बता रहा है कि आईआईटी जाने के बाद उसका प्लान IAS बनने का है.
जेईई टॉपर का वीडियो हो रहा शेयर
जेईई मेन में अपने भाई के साथ 99.99 परसेंटाइल हासिल करने वाले महरूफ अहमद खान से उनकी सफलता को लेकर कई सवाल किए गए. इसी दौरान न्यूज एजेंसी एएनआई के एक इंटरव्यू में महरूफ ने कुछ ऐसा कह दिया कि इसे सोशल मीडिया पर शेयर कर लोग सवाल उठाने लगे हैं. लोगों का कहना है कि महरूफ सीट बर्बाद करने काम कर रहे हैं. वहीं कुछ लोगों ने कहा कि ये हमारे एजुकेशन सिस्टम और पेरेंट्स के दवाब का असर है. कुछ लोग कह रहे हैं कि भारत सरकार का इतना खर्चा करने के बाद ऐसा कदम उठाना गलत है.
ऐसा क्या बोल गए महरूफ?
महरूफ से जब पूछा गया कि कैसे उन्होंने और उनके भाई ने सेम नंबर हासिल किए हैं, तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा- जब से शुरू किया, तभी से एक ही साथ पढ़ते थे और डाउट क्लियर करते थे. हम दोनों भाई एक दूसरे को मोटिवेट भी करते रहते थे, जिससे परफॉर्मेंस इंप्रूव होता गया और कॉम्पिटिशन भी बना रहा. हम ओडिशा से आते हैं और 10वीं क्लास से कोटा में पढ़ने आ गए. पहले मुझे जेईई एडवांस्ड क्रैक करना है, फिर आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस करना है और उसके बाद फाइनली IAS बनने का प्लान है.
इंजीनियरिंग के बाद IAS बनने का ट्रेंड
ये पहला मामला नहीं है जब किसी छात्र ने ऐसी इच्छा जताई हो, भले ही लोग महरूफ को लेकर सवाल उठा रहे हों, लेकिन उनसे पहले कई लोग ऐसा कर चुके हैं. आईआईटी या फिर किसी दूसरे बड़े कॉलेज से इंजीनियरिंग करने के बाद कई लोगों ने सिविल सर्विस एग्जाम दिया और इसमें अच्छी रैंक हासिल कर IAS अधिकारी बने. वहीं कई लोग इंजीनयरिंग करने के बाद इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस (IES) में भी जाते हैं.
विकास दिव्यकीर्ति ने बताया था कारण
दृष्टि IAS के फाउंडर विकास दिव्यकीर्ति ने इसे लेकर अपने एक वीडियो में बताया है कि जो छात्र पढ़ने में अच्छे होते हैं, वही इंजीनियर बने होंगे, वही सीए या फिर मेडिकल की सीट क्रैक कर पाए होंगे. पेरेंट्स और आसपास के लोगों से एक परसेप्शन बनता है कि जो भी बच्चा पढ़ने में अच्छा है तो उसे इंजीनियरिंग या फिर मेडिकल में जाना ही चाहिए. इसके बाद बच्चों को धीरे-धीरे समझ आता है कि उन्हें आगे क्या करना है. यही वजह है कि कई बच्चे आईआईटी से सीधे सिविल सर्विसेज में चले जाते हैं. कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो बैकअप ऑप्शन के तौर पर इंजीनियरिंग या फिर मेडिकल की पढ़ाई को रखते हैं. अगर पूरी तैयारी के बाद भी IAS नहीं बन पाए तो फ्यूचर फिर भी सिक्योर रहेगा.