JEE Main की परीक्षा पास करने तक नहीं है, असली खेल JoSAA Counselling के दौरान शुरू होता है. कई बार 10,000 रैंक वाले छात्र को टॉप NIT नहीं मिलता, जबकि 30,000 रैंक वाला छात्र वहां मजे से पढ़ रहा होता है. ऐसा क्यों होता है आपके दिमाग में भी सवाल उठता होगा? असल में इसके पीछे खेल Home State (HS) और Other State (OS) कोटा का होता है.
क्या है 50-50 का ये फॉर्मूला?
देश के सभी NITs में सीटों का बंटवारा दो हिस्सों में होता है:
Home State Quota (50%): ये सीटें उस राज्य के छात्रों के लिए रिजर्व हैं जहां वह NIT स्थित है.
Other State Quota (50%): ये सीटें बाकी पूरे देश के छात्रों के लिए खुली हैं.
उदाहरण के तौप पर अगर आपने 12वीं की परीक्षा तमिलनाडु से दी है, तो आप NIT Trichy के लिए Home State कोटा के हकदार होंगे. यहां आपको बाहरी छात्रों (Other State) के मुकाबले कम रैंक पर भी कंप्यूटर साइंस मिल सकती है.
'होम स्टेट' तय कैसे होता है?
यहीं सबसे ज्यादा छात्र गलती करते हैं. होम स्टेट का मतलब वह राज्य नहीं है जहां आप पैदा हुए या जहां आपका घर है. JoSAA के नियमों के अनुसार, आपका होम स्टेट वही है जहां से आपने अपनी 12वीं (Class 12th) की परीक्षा पास की है.
अगर आप बिहार के रहने वाले हैं लेकिन पढ़ाई कोटा (राजस्थान) से की है, तो आपका होम स्टेट राजस्थान माना जाएगा, बिहार नहीं.
कटऑफ का बड़ा अंतर
टॉप NITs जैसे Warangal, Surathkal और Trichy में HS और OS कोटे की कटऑफ में जमीन-आसमान का फर्क होता है.
दिल्ली (NIT Delhi) या उत्तर-पूर्वी राज्यों (NIT Mizoram, Sikkim) के NITs में यह अंतर और भी गहरा हो जाता है. होम स्टेट के छात्रों को अपनी ही जमीन पर आरक्षण का फायदा मिलता है, जिससे कड़ी प्रतिस्पर्धा थोड़ी कम हो जाती है.
IITs में क्या है नियम?
बता दें कि यह कोटा सिस्टम केवल NITs और कुछ चुनिंदा संस्थानों पर लागू होता है. IITs में कोई होम स्टेट कोटा नहीं होता. वहां केवल ऑल इंडिया रैंक (AIR) के आधार पर दाखिला मिलता है.