NCERT की बजाय महंगी प्राइवेट किताबें खरीदने पर मजबूर कर रहा है स्कूल? ऐसे कर सकते हैं शिकायत

How to file a complaint against school : कई प्राइवेट स्कूलों पर आरोप है कि वे छात्रों पर प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबें खरीदने का दबाव डालते हैं, जो NCERT की किताबों की तुलना में कई गुना ज्यादा कीमत पर मिलती हैं.

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आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि 8वीं क्लास तक छात्रों को केवल NCERT या SCERT की किताबों से ही पढ़ाया जाए.

How To File A Complaint Against School : नए एकेडमिक सेशन 2026-27 की शुरुआत के साथ ही देशभर में स्कूलों की मनमानी और महंगी किताबों को लेकर बड़ा मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है. कई प्राइवेट स्कूलों पर आरोप है कि वे छात्रों पर प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबें खरीदने का दबाव डालते हैं, जो NCERT की किताबों की तुलना में कई गुना ज्यादा कीमत पर मिलती हैं. इस मामले में राज्यों के साथ-साथ अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने साफ कहा है कि स्कूलों में किसी भी तरह का अकेडमिक भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अगर कोई स्कूल इस दौरान नियमों का उल्लंघन करता है, तो छात्र या पैरेंट्स उसकी शिकायत कर सकते हैं. 

8वीं क्लास तक अनिवार्य होंगी NCERT की किताबें

आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि 8वीं क्लास तक छात्रों को केवल NCERT या SCERT की किताबों से ही पढ़ाया जाए. अक्सर देखा जाता है कि कुछ प्राइवेट स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें लगवाते हैं, जिनकी कीमत NCERT की तुलना में कई गुना ज्यादा होती है. इस कदम से पैरेंट्स को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

सरकार और आयोग ने यह भी साफ किया है कि पैरेंट्स अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी वेंडर से किताबें और यूनिफॉर्म खरीद सकते हैं, लेकिन वह तय सिलेबस और स्टैंडर्ड्स के अनुसार होनी चाहिए. शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की जबरन वसूली या कमर्शियलाइजेशन को पूरी तरह गलत बताया गया है. NHRC की अध्यक्षता कर रही पीठ ने सभी राज्य सरकारों और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है.

शिकायत कहां और कैसे करें?

  • अगर कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है तो पैरेंट्स और छात्र संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर सकते हैं - 
  • दिल्ली में: 9818154069, ddeact1@gmail.com.
  • हरियाणा में: 0172-5049801

इसके अलावा जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) या क्षेत्रीय शिक्षा अधिकारियों से भी संपर्क किया जा सकता है. सरकार और आयोग के इस कदम से उम्मीद है कि अब स्कूलों में किताबों और यूनिफॉर्म के नाम पर होने वाली मनमानी पर रोक लगेगी. इससे पैरेंट्स को आर्थिक राहत और छात्रों को समान शिक्षा व्यवस्था का लाभ मिल सकेगा.

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