IITs student exchanges program : देश के IIT में पढ़ने वाले अंडर ग्रेजुएट छात्रों को जल्द बड़ा मौका मिल सकता है. तैयारी ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें छात्र अपने IIT के अलावा देश के दूसरे IIT कैंपस में भी एक या दो सेमेस्टर पढ़ सकेंगे और वहां लिए गए कोर्स के क्रेडिट उनके मूल IIT में मान्य होंगे. यह सिफारिश पिछले साल अगस्त में हुई IIT काउंसिल की बैठक में सामने आई थी. काउंसिल ने लक्ष्य रखा है कि करीब 5 प्रतिशत अंडर ग्रेजुएट छात्रों को IITs के बीच एक्सचेंज का मौका मिले और क्रेडिट ट्रांसफर बिना रुकावट के हो. IIT काउंसिल के चेयरपर्सन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं. इस काउंसिल में सभी IIT के निदेशक और उनके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरपर्सन शामिल होते हैं.
IIT मद्रास के डीन (एकेडमिक कोर्सेज) प्रोफेसर प्रताप हरिदौस ने इंडियन एक्प्रेस को बताया, इस योजना पर काम जारी है और हर IIT को अपने सीनेट स्तर पर इसे मंजूरी देनी होगी. इसे लेकर काउंसिल स्तर पर सहमति बन चुकी है, लेकिन अभी एक साझा दस्तावेज तैयार किया जा रहा है जिस पर सभी IIT की सहमति जरूरी होगी. जैसे ही अलग-अलग IIT इसे मंजूर करेंगे, योजना को लागू किया जा सकेगा. फिलहाल काम दस्तावेज तैयार करने के चरण में है.
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उन्होंने बताया कि शुरुआती तौर पर करीब 5 प्रतिशत छात्रों के एक्सचेंज का लक्ष्य रखा गया है, हालांकि इसे लागू करते वक्त कुछ व्यावहारिक चुनौतियां आ सकती हैं. अगर किसी IIT में बाहर से ज्यादा छात्र आ गए और उतने बाहर नहीं गए तो हॉस्टल की क्षमता चुनौती बन सकती है.
इंटर्नशिप और इलेक्ट्रिव में भी मिलेगा फायदायह व्यवस्था इंटर्नशिप के मौके बढ़ाने में भी मदद कर सकती है. अभी तक ज्यादातर जगहों पर मई से जुलाई के बीच ही समर इंटर्नशिप होती थी, जिसे कई छात्र सीमित मानते थे. पाठ्यक्रम में बदलाव कर छठे सेमेस्टर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उसमें केवल चार इलेक्ट्रिव (चुने हुए विषय) रखे गए हैं. छात्र चाहें तो इन इलेक्ट्रिव को आगे या पीछे के सेमेस्टर में शिफ्ट कर सकते हैं और पूरा छठा सेमेस्टर इंटर्नशिप के लिए खाली कर सकते हैं. अगर इंटर IIT ट्रांसफर की सुविधा शुरू होती है तो छात्र ये इलेक्ट्रिव किसी दूसरे IIT में जाकर भी कर सकेंगे.
उन्होंने कहा कि हर IIT में हर विषय का विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होता. कई बार किसी खास IIT में ऐसा इलेक्ट्रिव मिलता है जो दूसरे में नहीं होता. जो छात्र कोर्स चुनने में बहुत सोच-समझकर फैसला लेते हैं, उनके लिए यह सुविधा खास तौर पर उपयोगी होगी. इससे स्टार्टअप जैसे दूसरे कामों पर ध्यान देने का मौका भी मिलेगा और पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी.
काउंसिल ने यह भी सुझाव दिया है कि IIT मद्रास की अगुवाई में एक इंटर IIT टीम ऐसा फ्लेक्सिबल क्रेडिट शेयरिंग फ्रेमवर्क तैयार करे, जिसे भविष्य में NIT, IIIT, IISER, NLU जैसे गैर IIT संस्थानों तक भी बढ़ाया जा सके. इसके लिए लागू करने के दिशा-निर्देश और समय सीमा भी तय की जाएगी.
प्रोफेसर हरिदोस ने बताया कि NIT के साथ पहले से एक कार्यक्रम चल रहा है, जिसमें फाइनल ईयर के छात्र IIT मद्रास आकर अपना आखिरी सेमेस्टर यहां पूरा करते हैं और फैकल्टी के साथ काम करते हैं. अगर छात्र और फैकल्टी दोनों संतुष्ट हों तो छात्र सीधे PhD प्रोग्राम में जा सकता है. उन्होंने कहा कि अब देखा जाएगा कि इस व्यवस्था को और बढ़ाने की जरूरत है या नहीं.