सोशल मीडिया पर इन दिनों कई रील्स और पोस्ट तेजी से वायरल हो रही हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि 1998 के IIT-JEE के टॉप रैंकर्स में से ज्यादातर आज विदेशों में काम कर रहे हैं. इन पोस्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि बड़ी संख्या में टॉपर्स आज Google, Microsoft, Waymo जैसी ग्लोबल कंपनियों या विदेशी विश्वविद्यालयों से जुड़े हुए हैं. इन रील्स के चलते एक बार फिर भारत से प्रतिभाओं के विदेश जाने, यानी ब्रेन ड्रेन, को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
वायरल दावे क्या कह रहे हैं
रील्स और पोस्ट्स में कहा जा रहा है कि 1998 के टॉप-10 IIT-JEE रैंकर्स में से अधिकतर ने आगे की पढ़ाई या करियर के लिए अमेरिका और अन्य देशों का रुख किया. कुछ के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने Harvard University और Massachusetts Institute of Technology जैसे संस्थानों से पढ़ाई की और अब ग्लोबल फाइनेंस या टेक कंपनियों में काम कर रहे हैं.
हालांकि, यह भी साफ है कि 1998 के टॉप-10 रैंकर्स की मौजूदा नौकरी और लोकेशन को लेकर कोई आधिकारिक या एक जगह पर उपलब्ध पुख्ता सूची सार्वजनिक रूप से मौजूद नहीं है. इन वायरल रील्स में कई बार IITs को व्यंग्यात्मक अंदाज में “American Institute of Technology” कहा जा रहा है और “पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा अमेरिका” जैसे वाक्य भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इसका मकसद यह दिखाना है कि भारत के टॉप इंजीनियरिंग संस्थानों से निकलने वाली बड़ी संख्या में प्रतिभाएं आखिरकार विदेशों में जाकर काम कर रही हैं.
पुरानी समस्या, नए उदाहरण
रील्स में दिए गए आंकड़े कितने सही हैं, इस पर पुख्ता तौर पर कुछ कहना मुश्किल है. लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि IITs जैसे शीर्ष संस्थानों से निकले प्रोफेशनल्स का विदेश जाना एक बड़ी और काफी पुरानी समस्या रही है. भारत के लिए चुनौती यह है कि ऐसे हालात बनाए जाएं, जहां टॉप टैलेंट को देश में ही रिसर्च, इनोवेशन और हाई-एंड जॉब्स के बेहतर मौके मिल सकें.