IISc बेंगलुरु के प्रोफेसर महेश काकडे को मिला रामानुजन पुरस्कार, गणित की दुनिया का बड़ा सम्मान

Ramanujan Prize 2026: प्रतिष्ठित रामानुजन पुरस्कार हर साल 45 साल से कम उम्र के गणितज्ञों को दिया जाता है, जो विकासशील देशों में रहकर गणित के उन फॉर्मूलों पर काम कर रहे हैं, जो काफी मुश्किल हैं.

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बेंगलुरु के प्रोफेसर को मिला रामानुजन पुरस्कार

बेंगलुरु में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) के मैथेमेटिक्स प्रोफेसर महेश काकडे को 2026 का रामानुजन पुरस्कार दिया गया है. ये गणित की दुनिया में मिलने वाले सबसे बड़े पुरस्कारों में शामिल है. प्रोफेसर महेश काकडे को अल्जेब्रिक नंबर थ्योरी (Algebraic Number Theory) के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ये बड़ा पुरस्कार मिला है. इंटरनेशनल सेंटर फॉर थ्योरेटिकल फिजिक्स (ICTP) और इंटरनेशनल मैथमेटिकल यूनियन (IMU) की तरफ से ये पुरस्कार हर साल दुनिया के तमाम देशों के गणितज्ञों को दिया जाता है.

इन चीजों को लेकर की थी रिसर्च

प्रोफेसर महेश काकडे को नॉन-कम्यूटेटिव इवासावा थ्योरी पर उनकी फाइंडिंग्स के अलावा ग्रॉस-स्टार्क और ब्रुमर-स्टार्क थ्योरी को सिद्ध करने में उनकी रिसर्च को लेकर ये सम्मान मिला है. उनके इस काम ने मैथेमिटिशियन डेविड हिल्बर्ट की मशहूर 12th प्रॉब्लम को सॉल्व करने की दिशा में काम को आसान किया है. प्रोफेसर काकडे को रामानुजन पुरस्कार से पहले भी गणित के क्षेत्र में उनके अहम योगदान के लिए इंफोसिस पुरस्कार और स्वर्णजयंती फेलोशिप मिल चुकी है. 

कौन हैं प्रोफेसर काकडे? 

प्रोफेसर महेश काकडे ने अपनी शुरुआती गणित की पढ़ाई इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट (ISI) से की है. उन्होंने यहां से बैचलर ऑफ मैथमैटिक्स किया था. इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई मशहूर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से की. यहां प्रोफेसर काकडे ने प्योर मैथेमेटिक्स में मास्टर डिग्री और पीएचडी पूरी की. इसके बाद उन्होंने दुनिया के तमाम बड़े संस्थानों में बतौर प्रोफेसर काम किया. 

इनमें प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से लेकर यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और किंग्स कॉलेज लंदन जैसे नाम शामिल हैं. इसके बाद प्रोफेसर काकडे IISc बेंगलुरु आ गए और यहीं अपनी रिसर्च का काम कर रहे हैं. साल 2023 में उनका नाम एशियन साइंटिस्ट 100 में भी शामिल किया गया था. 

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क्या है रामानुजन पुरस्कार?

रामानुजन पुरस्कार दुनिया के उन लोगों को दिया जाता है, जो गणित के किसी भी क्षेत्र में शानदार काम कर रहे हैं. महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के नाम पर ये पुरस्कार दिया जाता है. इसके लिए अधिकतम उम्र 45 साल है. साल 1964 में इसकी शुरुआत नोबेल विजेता अब्दुस सलाम ने की थी. गणित की तमाम अनसुलझी पहेलियों को सुलझाने और इसके लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग के लिए ये पुरस्कार एक मंच तैयार करता है. इसमें 10 हजार अमेरिकी डॉलर का इनाम भी दिया जाता है. 

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Ramanujan Prize 2026
Prof Mahesh Kakde
Ramanujan Prize