मान्यता रद्द होने के बाद कितने साल तक बंद रहता है स्कूल? ये है CBSE का नियम

अगर किसी स्कूल की CBSE से मान्यता रद्द हो जाती है, तो उसका क्या होता है, वो स्कूल कितने साल तक बंद रहता है और दोबारा से एफिलिएशन के लिए क्या करना पड़ता है. अगर आपका बच्चा भी सीबीएसई स्कूल में पढ़ता है, तो जान लीजिए इसका पूरा नियम.

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2 साल का बैन खत्म होने का मतलब यह कतई नहीं है कि तीसरे साल की पहली तारीख को स्कूल को मान्यता मिल जाएगी.

CBSE School Recognition Cancel Rules: क्या हो अगर आप सुबह उठें और पता चले कि आपके बच्चे का स्कूल अब CBSE (Central Board of Secondary Education) से मान्यता प्राप्त नहीं रहा. कुछ समय पहले ही नोएडा के उत्तराखंड पब्लिक स्कूल के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. बोर्ड ने अनियमितताओं के चलते इस स्कूल की मान्यता (Affiliation) रद्द कर दी है. इसके बाद अभिभावकों के मन में सबसे बड़ा डर यह है कि अब उनके बच्चों का क्या होगा और क्या यह स्कूल अब कभी दोबारा नहीं खुलेगा.

CBSE के नियम इस मामले में बहुत सख्त हैं. स्कूल पर ताला लगना और दोबारा मान्यता पाना कोई हफ्तों का काम नहीं, बल्कि सालों की कानूनी प्रक्रिया है. आइए जानते हैं CBSE एफिलिएशन नियम (CBSE Affiliation Bye Laws) क्या हैं और मान्यता रद्द होने के बाद स्कूल कितने साल तक बंद रहता है.

मान्यता रद्द होने के बाद कितने साल स्कूल बंद रहता है

जब CBSE किसी स्कूल की मान्यता छीनता है, तो वह सीधा 2 साल का बैन लगा देता है. इसका मतलब यह है कि स्कूल प्रशासन अगले 24 महीनों तक बोर्ड के पास दोबारा मान्यता के लिए गिड़गिड़ा भी नहीं सकता. यह अवधि इसलिए तय की गई है, ताकि स्कूल अपनी उन गलतियों (जैसे कमजोर बिल्डिंग, कम सैलरी या धांधली) को पूरी तरह सुधार सके, जिनकी वजह से उस पर गाज गिरी है.

री-एफिलिएशन कितने साल तक हो सकता है

2 साल का बैन खत्म होने का मतलब यह कतई नहीं है कि तीसरे साल की पहली तारीख को स्कूल को मान्यता मिल जाएगी. 2 साल बाद स्कूल को एक 'फ्रेश एप्लिकेशन' डालनी होती है. इसके बाद बोर्ड की एक नई टीम स्कूल का दौरा करती है. वे देखते हैं कि क्या पुरानी कमियां दूर हुई हैं. इस पूरी जांच-पड़ताल और कागजी कार्रवाई में अक्सर 2 से 4 साल का समय लग जाता है यानी एक बार मान्यता गई, तो स्कूल की साख और संचालन को पटरी पर आने में आधा दशक लग सकता है.

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बच्चों का क्या होता है

मान्यता रद्द होते ही सबसे पहला सवाल बच्चों के साल का आता है. नियम के मुताबिक, स्कूल को हर छात्र को तुरंत ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) देना होगा. इस TC की मदद से बच्चे किसी भी दूसरे मान्यता प्राप्त स्कूल में एडमिशन ले सकते हैं. बोर्ड अक्सर यह सुनिश्चित करता है कि बीच सत्र में बच्चों की पढ़ाई न रुके, लेकिन स्कूल बदलने का मानसिक और आर्थिक बोझ अभिभावकों पर ही आता है.

क्या स्कूल हमेशा के लिए बंद हो जाता है

ऐसा नहीं है. स्कूल की बिल्डिंग या मैनेजमेंट खत्म नहीं होता है, लेकिन उसकी पहचान खत्म हो जाती है. जब तक दोबारा मान्यता न मिले, वह स्कूल न तो बोर्ड परीक्षा आयोजित कर सकता है और न ही खुद को CBSE स्कूल कह सकता है. अगर मैनेजमेंट सुधार नहीं करता, तो यह बैन हमेशा के लिए भी बढ़ सकता है.

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