फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं. अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने भारत और फ्रांस के बीच एकेडमिक मोबिलिटी को मजबूत पर जोर दिया. फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रो ने दोहराया कि फ्रांस का टारगेट 2030 तक 30,000 इंडियन स्टूडेंट्स को होस्ट करना है. ये अनाउंसमेंट सबसे पहले 2023 में किया गया था. इस अनाउंसमेंट के बाद, इंडिया में फ्रेंच एम्बेसी ने इंडियन स्टूडेंट्स को अट्रैक्ट करने के लिए कई तरीके पेश किए थे. जिसमें पांच साल का शॉर्ट-स्टे शेंगेन वीजा भी शामिल है. यूरोप में पढ़ाई करने का सपना देख रहे छात्रों के लिए ये एक अच्छा अवसर है.
"2030 तक 30,000 स्टूडेंट्स लाने का फैसला"
भारत दौरे पर आए मैक्रों ने इस बात को फिर दोहराया है और कहा फ्रांस स्टूडेंट्स, खासकर PhD जैसे लॉन्ग-टर्म प्रोग्राम करने वालों को बेहतर सपोर्ट देने के लिए वीजा और एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस को आसान बनाएगा. उन्होंने कहा, "हमारे लिए यह बहुत जरूरी है कि हम ज्यादा भारतीय स्टूडेंट्स का स्वागत करें और ज्यादा फ्रेंच स्टूडेंट्स को यहां आने दें. हम हर साल 10,000 की बात करते हैं. हमने प्रधानमंत्री मोदी के साथ मिलकर 2030 तक 30,000 स्टूडेंट्स लाने का फैसला किया है."
हेल्थ में AI के लिए इंडो-फ्रेंच सेंटर, AIIMS नई दिल्ली, सोरबोन यूनिवर्सिटी और पेरिस ब्रेन इंस्टीट्यूट के बीच एक जॉइंट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के तहत बनाया गया है. इस कोलेबोरेशन में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी दिल्ली और दूसरे फ्रेंच इंस्टीट्यूशन भी शामिल हैं. यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चलने वाली रिसर्च, मेडिकल शिक्षा और क्लिनिकल इनोवेशन को आगे बढ़ाने पर फोकस करेगा. खासकर ब्रेन हेल्थ और ग्लोबल हेल्थकेयर सिस्टम में. टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता की मांग करते हुए, मैक्रों ने कहा कि भारत और फ्रांस को "अपने भरोसेमंद AI सिस्टम" बनाने चाहिए और दूसरी जगहों पर डेवलप की गई टेक्नोलॉजी पर निर्भरता कम करनी चाहिए.
उन्होंने कहा, "भारत और फ्रांस अपने भरोसेमंद AI सिस्टम बनाने के लिए ज़रूरी कंप्यूटिंग कैपेसिटी और टैलेंट को डेवलप करने के लिए कमिटेड हैं. क्योंकि हम सिर्फ़ कहीं और बनाई और मैनेज की गई टेक्नोलॉजी पर भरोसा नहीं कर सकते.