विदेश से डॉक्टरी पढ़कर आए छात्रों का NMC के खिलाफ दिल्ली में जोरदार प्रदर्शन, जानें क्या है पूरा विवाद

विदेश से MBBS करने वाले छात्रों ने NMC के नए नोटिस के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन किया. जानें क्यों ऑनलाइन क्लासेस और इंटर्नशिप को लेकर मचा है बवाल.

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प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि जब पूरी दुनिया में लॉकडाउन था, तब भारत समेत हर जगह ऑनलाइन पढ़ाई ही एकमात्र रास्ता था.

FMGs Protest : विदेश से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई करके लौटे भारतीय छात्र यानी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (FMGs) दिल्ली की सड़कों पर उतर आए हैं. नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के दफ्तर के बाहर छात्रों ने जमकर प्रदर्शन किया और एक नए नोटिस को वापस लेने की मांग की. छात्रों का कहना है कि सरकार के एक नए फैसले ने हजारों डॉक्टरों का भविष्य दांव पर लगा दिया है.आपको बता दें कि यह प्रदर्शन ऑल फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एसोसिएशन (AFA) और AIMSA जैसे संगठनों के नेतृत्व में यह प्रदर्शन हुआ. चलिए आइए जानते हैं आखिर क्या है पूरा मामला.... 

क्यों कर रहे हैं FMGs प्रोटेस्ट?

दरअसल, विवाद NMC द्वारा 6 मार्च 2026 को जारी किए गए एक स्पष्टीकरण (Clarification) से हुआ. इस नोटिस में NMC ने कहा है कि जिन छात्रों ने कोविड के दौरान ऑनलाइन क्लासेस ली थीं, उन्हें अब उस समय की भरपाई के लिए अलग से 'फिजिकल ऑनसाइट ट्रेनिंग' यानी अस्पताल या कॉलेज जाकर पढ़ाई करनी होगी.

छात्रों का गुस्सा इस बात पर है कि कोरोना को बीते लगभग 4-6 साल हो चुके हैं. कई छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, इंटर्नशिप कर रहे हैं या भारत का स्क्रीनिंग टेस्ट (FMGE) पास कर चुके हैं. अब इतने सालों बाद नए नियम थोपना छात्रों के साथ गलत है.

छात्रों की मुख्य मांगें और परेशानीदेरी से फैसला
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छात्रों का कहना है कि कोरोना 2020-22 के बीच था, उसका स्पष्टीकरण 2026 में देना समझ से परे है.

दोहरे नियम

18 नवंबर 2021 से पहले और बाद में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए अलग-अलग पेच फंसा दिए गए हैं.

कोर्स का ड्यूरेशन

NMC का कहना है कि ऑनलाइन क्लास के बदले फिजिकल क्लास करनी होगी और इसके लिए कोर्स का समय भी बढ़ाना होगा. बिना समय बढ़ाए 'कंपनसेशन सर्टिफिकेट' मान्य नहीं होगा.

'हमें परेशान किया जा रहा है'

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा कि जब पूरी दुनिया में लॉकडाउन था, तब भारत समेत हर जगह ऑनलाइन पढ़ाई ही एकमात्र रास्ता था. अब सालों बाद यह कहना कि वह पढ़ाई अधूरी थी, गलत है. छात्रों के मुताबिक, आंध्र हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद NMC जानबूझकर कड़े नियम बनाकर उन्हें परेशान कर रही है.

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छात्रों का आरोप है कि उन्हें अपराधियों जैसा महसूस कराया जा रहा है. बिना लाइसेंस वे किसी अस्पताल में काम नहीं कर सकते और बेरोजगार बैठे हैं.

एक छात्रा ने भावुक होकर कहा, "डिग्री पूरी करने के बाद हमसे फिर से निचली कक्षा दोहराने को कहना मानसिक टॉर्चर है. अदालतों की तरह हमें भी बस नई तारीखें और नोटिस मिलते हैं. खासकर पेंडेमिक के बाद से सिर्फ FMG छात्रों को टारगेट करना पूरी तरह गलत है.

वहीं, AIMSA के नेशनल कन्वेनर डॉ. अपूर्व दलवी ने बताया कि उनकी मुलाकात NMC अधिकारियों से हुई है. अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि वे छात्रों की दिक्कतों को देखते हुए नोटिस में बदलाव करने पर विचार कर सकते हैं. इससे हजारों छात्रों को उम्मीद की किरण दिखी है.

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