Fighter Jer kaun Udata hai : आसमान में तेज रफ्तार से उड़ते फाइटर जेट को देखकर हर किसी के मन में एक अलग ही रोमांच पैदा होता है. कई युवाओं का सपना होता है कि वो भी एक दिन देश के लिए ऐसे जेट उड़ाएं और यूनिफॉर्म में गर्व से खड़े हों. लेकिन ये सपना जितना शानदार दिखता है, उसे पूरा करने का रास्ता उतना ही मेहनत भरा होता है. सही पढ़ाई, कड़ी ट्रेनिंग और मजबूत हौसले के बाद ही ये मुकाम हासिल होता है. हर साल हजारों उम्मीदवार कोशिश करते हैं, लेकिन चुनिंदा लोग ही इस सफर को पूरा कर पाते हैं.
कौन उड़ाता है फाइटर जेटफाइटर जेट भारतीय वायुसेना के ट्रेंड पायलट उड़ाते हैं. ये पायलट फ्लाइंग ब्रांच का हिस्सा होते हैं. इनका काम सिर्फ विमान उड़ाना नहीं बल्कि देश की सुरक्षा से जुड़े मिशन पूरे करना भी होता है. ट्रेनिंग के दौरान इन्हें अलग-अलग तरह के एयरक्राफ्ट संभालना सिखाया जाता है.
12वीं के बाद इस फील्ड में आने का सबसे बड़ा रास्ता NDA है. ये परीक्षा UPSC कराता है. इसमें पास होने के बाद पुणे स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी में करीब तीन साल की ट्रेनिंग मिलती है. इसके बाद उम्मीदवारों को एयरफोर्स की फ्लाइंग ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है. इसके लिए 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स होना जरूरी है.
ग्रेजुएशन के बाद एंट्री का तरीकाग्रेजुएशन के बाद उम्मीदवार CDS के जरिए भी एयरफोर्स में जा सकते हैं. ये परीक्षा भी UPSC ही आयोजित करता है. इसमें सिलेक्शन होने पर उम्मीदवारों को एयरफोर्स अकादमी में ट्रेनिंग दी जाती है. इसके लिए ग्रेजुएशन के साथ 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स पढ़ा होना जरूरी होता है. उम्र आमतौर पर 19 से 24 साल के बीच होती है.
इसके अलावा AFCAT के जरिए भी फ्लाइंग ब्रांच में एंट्री मिलती है. ये परीक्षा खास तौर पर एयरफोर्स की अलग-अलग शाखाओं के लिए होती है. इसमें भी ग्रेजुएशन और फिजिक्स मैथ्स की बेसिक एलिजिबिलिटी जरूरी होती है.
ट्रेनिंग और रैंक का सफरसिलेक्शन के बाद उम्मीदवारों को एयर फोर्स एकेडमी में भेजा जाता है. यहां कड़ी फिजिकल और तकनीकी ट्रेनिंग होती है. इसी दौरान तय होता है कि कौन फाइटर जेट उड़ाने के लिए तैयार है. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद शुरुआत फ्लाइंग ऑफिसर के पद से होती है. आगे प्रमोशन के साथ फ्लाइट लेफ्टिनेंट, स्क्वॉड्रन लीडर जैसी रैंक मिलती हैं.
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