दिल्ली के नरेला में बनेगा 'एजुकेशन हब', जानें क्या होगी इसकी खासियत

नए यूनिवर्सिटी कैंपस बनने से राष्ट्रीय राजधानी में उच्च शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी. नरेला एजुकेशन सिटी एक शेयर्ड कैंपस मॉडल को फॉलो करेगा. जिससे कई इंस्टीट्यूशन कॉमन लाइब्रेरी, लैब, ऑडिटोरियम और रिसर्च फैसिलिटी का इस्तेमाल कर सकेंगे.

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पहले इस परियोजना के लिए 500 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे.

दिल्ली का नरेला एजुकेशन हब बनने जा रहा है. दिल्ली सरकार ने शनिवार को अपने नरेला एजुकेशन सिटी प्रोजेक्ट के बजट को बढ़ाकर Rs 1,300 करोड़ कर दिया. साथ ही कई यूनिवर्सिटी को ऑफिशियली जमीन सौंप दी गई है. इस कदम से राजधानी में हायर एजुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ा विस्तार होगा. नरेला को एक विश्वस्तरीय शिक्षा और नवाचार केंद्र बनाने की और दिल्ली सरकार का ये बड़ा कदम है. बता दें कि नरेला एजुकेशन सिटी के लिए पहले बजट 500 करोड़ रुपये का था. 

दरअसल पहले इस परियोजना के लिए 500 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए अब इसे बढ़ाकर 1,300 करोड़ रुपये कर दिया गया है. दिल्ली शिक्षक विश्वविद्यालय को करीब 12.69 एकड़ और गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय को 22.43 एकड़ जमीन के कागज सौंपे गए है. इससे इस परियोजना को गति मिलने की उम्मीद है.

कैसा होगा नरेला एजुकेशन हब

नरेला एजुकेशन सिटी एक शेयर्ड कैंपस मॉडल को फॉलो करेगा. जिससे कई इंस्टीट्यूशन कॉमन लाइब्रेरी, लैब, ऑडिटोरियम और रिसर्च फैसिलिटी का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे डुप्लीकेशन कम होगा और रिसोर्स का ऑप्टिमाइजेशन होगा.

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शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली में उच्च और तकनीकी शिक्षा को मजबूत बनाने की सरकार की लंबी योजना के तहत यह फैसला लिया गया है. इससे पहले इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी महिला विश्ववविद्यालय को 50 एकड़ जमीन दी जा चुकी है. उन्होंने कहा कि अब नयी जमीन मिलने के बाद सरकार नरेला में करीब 160 एकड़ में फैले विश्वस्तरीय शिक्षा और नवाचार केंद्र की दिशा में आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि जमीन आवंटन के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को भुगतान की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है.

दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने कहा, नए यूनिवर्सिटी कैंपस बनने से राष्ट्रीय राजधानी में उच्च शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी. साथ ही डीडीए के नरेला को शिक्षा का हब और आधुनिक सुविधाओं से भरपूर एक आत्मनिर्भर मॉडल सब-सिटी के रूप में विकसित करने के प्रयासों को भी बढ़ावा मिलेगा."

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