क्या मदरसों में होने वाले कामिल-फाजिल को UGC मान्यता देता है? जान लीजिए जवाब

Kamil And Fazil Courses : मदरसों में मिलने वाली कामिल और फाजिल डिग्रियों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार जल्द बड़ा फैसला ले सकती है. जानिए UGC इन्हें मान्यता देता है या नहीं और सुप्रीम कोर्ट ने इस पर क्या कहा है.

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यूपी में मदरसों को लेकर बड़ा फैसला

Kamil And Fazil Courses : उत्तर प्रदेश सरकार मदरसों में चल रहे कामिल (ग्रेजुएशन) और फाजिल (पोस्ट ग्रेजुएशन) कोर्सेज को बंद करने की तैयारी में है. इस संबंध में एक प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली कैबिनेट के सामने रखा जाना है. मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर कैबिनेट की बैठक मंगलवार (4 अगस्त, 2026) को होने जा रही है. जिसमें शामिल 21 प्रस्तावों में से एक ये भी है. इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद मदरसों में केवल 12वीं तक की पढ़ाई ही कराई जा सकेगी.

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 5 नवंबर 2024 के आदेश के अनुसार लिया जा रहा है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मदरसों में दी जाने वाली कामिल और फाजिल डिग्रियों को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (UGC) की मान्यता प्राप्त है? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की वजह और कानूनी स्थिति.

क्या UGC देता है कामिल-फाजिल को मान्यता?

सुप्रीम कोर्ट ने अंजुम कादरी एवं अन्य बनाम भारत संघ मामले में साफ किया था कि मदरसे कामिल और फाजिल जैसी औपचारिक उच्च शिक्षा की डिग्रियां जारी नहीं कर सकते, क्योंकि ये कोर्सेज यूजीसी के रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क से बाहर हैं. अदालत ने कहा कि उच्च शिक्षा से जुड़े कोर्स केवल UGC के नियमों और स्टैंडर्ड्स के अनुसार ही चलाए जा सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार की तैयारी

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2004 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, लेकिन यह भी साफ किया कि मदरसों को औपचारिक ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर की डिग्रियां देने का अधिकार नहीं है. इसी फैसले के आधार पर उत्तर प्रदेश सरकार अब कामिल और फाजिल कोर्सेज को बंद करने की तैयारी कर रही है. 

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क्या होती हैं कामिल और फाजिल डिग्रियां?

कामिल अरबी, फारसी और इस्लामिक स्टडीज का तीन साल का कोर्स है, जिसे अब तक मदरसा बोर्ड ग्रेजुएशन (BA) के बराबर मानता रहा है. इसके बाद दो साल का कोर्स  फाजिल कराया जाता है, जिसे पोस्ट-ग्रेजुएशन (MA) के बराबर माना जाता है. हालांकि, इन कोर्सेज को UGC की औपचारिक मान्यता प्राप्त नहीं है. यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें उच्च शिक्षा की मान्य डिग्रियों के रूप में स्वीकार नहीं किया.

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