दिल्ली सरकार ने राजधानी के निजी स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं. ये निर्देश किताबें, कॉपी और स्कूल की वर्दी खरीदने से जुड़े हुए हैं. निजी स्कूलों से साफ तौर पर कहा है कि वे छात्रों या अभिभावकों को किसी खास विक्रेताओं से किताबें, कॉपी या वर्दी खरीदने के लिए मजबूर न करें. अभिभावक अपनी मर्जी के किसी भी स्थान से इन वस्तुओं को खरीदने के लिए आजाद है. शिक्षा विभाग ने कहा कि यह निर्देश उन शिकायतों के बाद जारी किया गया है जिनमें कहा गया है कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम और नियम (डीएसईएआर), 1973 और शिक्षा का अधिकार नियम, 2011 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए कुछ विद्यालय अभिभावकों को खास दुकानों से शैक्षिक सामग्री खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं. निर्देश में कहा गया कि विद्यालय निर्धारित वस्तुओं की स्पष्ट, कक्षावार सूचियां अभिभावकों के देंगे और खुले बाजार में कई खरदीने के विकल्प सुनिश्चित करें.
20 अप्रैल मुहैया होंगी किताबें
इसके अलावा दिल्ली के सरकारी विद्यालयों को 20 अप्रैल तक पाठ्यपुस्तकें मुहैया करा दी जाएंगी. राजधानी सरकार के शिक्षामंत्री आशीष सूद ने कहा
छपाई के लिए अपनाई गई निविदा प्रक्रिया के कारण पुस्तकों की आपूर्ति में थोड़ी देरी हुई. छपाई के लिए अपनाई गई इस प्रक्रिया से शिक्षा निदेशालय (डीओई) के लिए लागत में 20 से 30 प्रतिशत की कमी आती है और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है.
उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तकों की छपाई बेहतर गुणवत्ता में की जा रही है और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के विद्यालयों में प्राथमिक कक्षाओं के लिए वितरण पहले ही शुरू हो चुका है जबकि अन्य संस्थानों को 20 अप्रैल तक ये पाठ्यपुस्तकें प्राप्त होने की उम्मीद है.
बता दें कि कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने सरकारी विद्यालयों में पाठ्यपुस्तक वितरण में हो रही देरी पर चिंता जताई थी और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के एक सप्ताह बाद भी छात्रों को पाठ्यपुस्तकें नहीं मिली हैं. हालांकि सरकार का अब दावा है कि जल्द दी सरकारी स्कूलों में किताबें पहुंच जाएंगी.