दिल्ली में नर्सरी एडमिशन का समय आते ही हजारों माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है. फॉर्म भरने, डॉक्यूमेंट जमा करने और लिस्ट का इंतजार करने के बाद जब दूसरी लिस्ट में भी बच्चे का नाम नहीं आता, तो कई लोगों को लगता है कि अब उनके बच्चे का एडमिशन शायद हो ही नहीं पाएगा. लेकिन सच यह है कि घबराने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि एडमिशन के कई और रास्ते खुले रहते हैं. बस सही जानकारी होना जरूरी है.
नर्सरी एडमिशन इतना कठिन क्यों लगता है?
दिल्ली में कुछ चुनिंदा प्राइवेट स्कूल बहुत पॉपुलर हैं, इसलिए वहां सीटें कम और अप्लाई करने वाले ज्यादा होते हैं. कई बार 50–60 सीटों के लिए हजारों एप्लीकेशन आ जाती हैं. इसी भीड़ के चलते माता-पिता को लगता है कि एडमिशन मिलना बहुत मुश्किल है, जबकि असल में समस्या सिर्फ कुछ स्कूलों की ज्यादा डिमांड होती है.
पॉइंट सिस्टम कैसे काम करता है?
ज्यादातर प्राइवेट स्कूल एडमिशन के लिए अंक प्रणाली यानी पॉइंट सिस्टम अपनाते हैं. इसमें घर से स्कूल की दूरी, भाई-बहन का उसी स्कूल में पढ़ना, एलुमनाई पैरेंट्स जैसे मानदंडों पर अंक मिलते हैं. दूरी का फैक्टर सबसे अहम होता है, जो बच्चा स्कूल के पास रहता है, उसे ज्यादा पॉइंट मिलते हैं. कुछ स्कूलों में टाई होने पर लॉटरी सिस्टम भी लागू किया जाता है.
दूसरी लिस्ट में नाम नहीं आया तो क्या करें?
अगर दूसरी लिस्ट में भी नाम नहीं है, तो इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे का एडमिशन नहीं होगा. स्कूल अक्सर तीसरी या वेटिंग लिस्ट भी जारी करते हैं. इसके अलावा जिन स्कूलों में सीटें खाली रह जाती हैं, वे बाद में भी आवेदन स्वीकार करते हैं. इसलिए नियमित तौर पर स्कूल की वेबसाइट या नोटिस बोर्ड चेक करना जरूरी है.
दूसरे स्कूल भी हैं विकल्प
दिल्ली में सिर्फ कुछ नामी स्कूल ही नहीं, बल्कि सैकड़ों अच्छे स्कूल मौजूद हैं जहां एडमिशन आसानी से मिल सकता है. कई पैरेंट्स सिर्फ जाने-माने स्कूलों पर फोकस करते हैं और बाकी विकल्पों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे परेशानी बढ़ती है. समझदारी यह है कि एक साथ कई स्कूलों में आवेदन किया जाए.
एडमिशन के लिए लोग क्या-क्या करते हैं?
कुछ पैरेंट्स अपने पसंदीदा स्कूल के पास किराए पर घर लेकर रहने लगते हैं ताकि ज्यादा पॉइंट हासिल कर सकें. कई लोग एक दर्जन से ज्यादा स्कूलों में फॉर्म भरते हैं. हालांकि एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि सही जानकारी और समय पर आवेदन करना ही सबसे अच्छा तरीका है, किसी शॉर्टकट की जरूरत नहीं होती.
यानी दूसरी लिस्ट में भी नाम नहीं आया तो घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह आखिरी मौका नहीं होता. सही स्कूल चुनकर, अगली लिस्ट देखते रहकर और दूसरे स्कूलों में भी फॉर्म भरकर बच्चे का एडमिशन कराया जा सकता है. सबसे जरूरी है धैर्य और सही जानकारी रखना, यही सफलता का सही तरीका है.