हाल ही में दिल्ली के 75 'CM श्री' स्कूलों में कक्षा 6, 9 और 11 में दाखिले के लिए रजिस्ट्रेशन चल रहा था. इस दौरान लोगों के मन में सवाल था कि आखिर ये कौन से सरकारी स्कूल हैं और इनमें अलग से एडमिशन क्यों लिए जा रहे हैं. ये स्कूल राजधानी में सरकारी शिक्षा की तस्वीर बदलने का वादा कर रहे हैं. 2025-26 के बजट में बीजेपी के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार की तरफ से शुरू की गई 'CM श्री' योजना, केंद्र की 'PM श्री' योजना पर आधारित है. इसका मकसद नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के साथ मिलकर गरीब बच्चों को बिना किसी खर्च के विश्व स्तरीय और आधुनिक शिक्षा देना है. आइए जानते हैं कि ये वाले सरकारी स्कूल राजधानी के बाकी सरकारी स्कूलों से कितने अलग हैं. हमने खुद ग्राउंड पर जाकर इसका रियलिटी चेक किया है.
सीएम श्री स्कूलों में दाखिला केवल दिल्ली के निवासियों के लिए है और इसके लिए प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) देनी होगी. माता-पिता के बीच इन स्कूलों को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा था और बड़ी संख्या में आवेदन किए गए.
पुराने सरकारी स्कूलों और CM श्री स्कूलों में अंतर
दिल्ली में पहले से ही 1,000 से ज्यादा सरकारी स्कूल चल रहे हैं. इनमें से कई स्कूलों को 2015 से 2025 के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के दौरान सुधारा गया था. उस समय शिक्षा सुधारों के तहत 20,000 से ज्यादा नए क्लासरूम, साफ शौचालय, पीने का पानी, लाइब्रेरी और साइंस लैब जैसी सुविधाएं दी गई थीं. क्लासरूम को स्मार्ट बोर्ड से आधुनिक बनाया गया था.
CM श्री स्कूलों की खासियत
जहाँ पुराने सुधारों का ध्यान बुनियादी सुविधाओं पर था, वहीं 'CM श्री' स्कूल भविष्य की पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हैं. इन्हें "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" के रूप में बनाया गया है. इनकी कई खूबिया हैं-
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से चलने वाले लर्निंग हब और वर्चुअल रियलिटी (VR) टूल्स
- बच्चों के लिए रोबोटिक्स और STEM (विज्ञान व तकनीक) लैब
- बायोमेट्रिक हाजिरी, डिजिटल लाइब्रेरी और ई-संसाधन
- सोलर पैनल और कचरा प्रबंधन वाले 'ग्रीन कैंपस'
- JEE, NEET और सिविल सर्विस जैसी परीक्षाओं की तैयारी स्कूल में ही कराई जाएगी, जिससे बच्चों को प्राइवेट कोचिंग न जाना पड़े
- नर्सरी से ही इंग्लिश मीडियम पढ़ाई, खेल-कूद और कला के लिए विशेष इंतजाम
सीएम श्री स्कूल में क्या-क्या दिखा?
NDTV ने सरोजिनी नगर में बने CM श्री स्कूल का दौरा किया. इस स्कूल का उद्घाटन 17 फरवरी 2026 को किया गया, इसमें 60 स्मार्ट क्लासरूम हैं जहां 1,800 बच्चे पढ़ सकते हैं. स्कूल के प्रिंसिपल हितेंद्र यादव ने बताया, "यहाँ 100% क्लासरूम AI से लैस हैं. हमारे पास भाषा सीखने के लिए लैब और रोबोटिक्स लैब हैं. बच्चों के लिए सात मंजिला लाइब्रेरी और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी बनाया जा रहा है. साथ ही दिव्यांग बच्चों के लिए खास क्लासरूम और करियर काउंसलिंग की सुविधा भी है."
सरकारी स्कूल में भी सुविधाएं
दूसरी तरफ, तुलना के लिए NDTV ने पास के ही गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल नंबर 3 का भी दौरा किया. यह एक सामान्य सरकारी स्कूल है जिसे AAP सरकार के समय सुधारा गया था. यहां भी स्मार्ट बोर्ड वाली क्लास, साफ लैब और लाइब्रेरी मौजूद हैं. यहां की पढ़ाई का स्तर अच्छा है और बुनियादी सुविधाएं पूरी हैं.
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क्या है दोनों में बड़ा अंतर
पुराने सरकारी स्कूल अच्छी बुनियादी शिक्षा और सबको साथ लेकर चलने पर ध्यान देते हैं, लेकिन उनमें CM श्री स्कूलों जैसी आधुनिक रोबोटिक्स लैब, VR तकनीक और करियर गाइडेंस की कमी है. जहां सामान्य सरकारी स्कूलों में पड़ोस के बच्चों को सीधे दाखिला मिलता है, वहीं CM श्री स्कूलों में केवल परीक्षा पास करने वाले चुनिंदा बच्चों को ही जगह मिलती है.
सीएम श्री स्कूल में कैसे मिलता है एडमिशन?
दिल्ली के 75 में से 33 खास CM श्री स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक के लिए दाखिला 'मेरिट' यानी योग्यता के आधार पर होता है. इसके लिए साल 2025-26 के सेशन के लिए 'CM श्री स्कूल एडमिशन टेस्ट 2025' नाम की एक प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है. शिक्षा निदेशालय (DoE) के नियमों के अनुसार, केवल वही छात्र इसके योग्य हैं जो दिल्ली के निवासी हैं और दिल्ली के ही किसी मान्यता प्राप्त स्कूल में पढ़ रहे हैं.
बाकी सरकारी स्कूलों में एडमिशन
दिल्ली के बाकी सरकारी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया काफी सीधी और आसान होती है. यहां दाखिला मुख्य रूप से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और कागजों की जांच (Document Verification) के आधार पर होता है. छोटी कक्षाओं में दाखिला अक्सर 'लॉटरी' या घर से स्कूल की दूरी (पड़ोस का स्कूल) के आधार पर दिया जाता है. बीच की कक्षाओं में खाली सीटों के आधार पर बच्चों को बिना किसी परीक्षा के एडमिशन मिल जाता है.
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