Degree vs Skills: क्या वाकई रद्दी का टुकड़ा बन गई है डिग्री? जानें आज के दौर में स्किल भारी है या सर्टिफिकेट

एक समय था जब हाथ में डिग्री आते ही नौकरी पक्की मानी जाती थी, लेकिन अब हवा का रुख बदल चुका है. आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स से कि इस बदलते दौर में क्या वाकई डिग्री की वैल्यू खत्म हो गई है या फिर कहानी कुछ और है.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिग्री करियर का दरवाजा खोलती है, लेकिन सफलता के लिए प्रैक्टिकल स्किल्स जरूरी हैं.

Kya digree ki value khatm ho gayi hai: एक समय था जब हाथ में डिग्री आते ही नौकरी पक्की मानी जाती थी, लेकिन अब हवा का रुख बदल चुका है. आज के दौर में हर युवा के मन में एक ही सवाल है क्या सिर्फ डिग्री लेकर अच्छी नौकरी मिल जाएगी? या फिर कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर सिर्फ कोई शॉर्ट-टर्म कोर्स या स्किल सीख लेना काफी है? इसी को लेकर हमने एक्सपर्ट्स से बात की क्या इस बदलते दौर में वाकई डिग्री की वैल्यू खत्म हो गई है या फिर कहानी कुछ और है? चलिए जानते हैं उनकी इसपर क्या राय है...

IIT या UPSC कौन सी परीक्षा है ज्यादा कठिन, IPS अवधेश दीक्षित ने दिया इसका जवाब

स्किल बेस्ड कोर्सेज का बढ़ता क्रेज

आजकल टेक, डिजिटल मार्केटिंग, डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड इंडस्ट्री जैसी फील्ड्स में डिग्री से ज्यादा इस बात पर जोर दिया जाता है कि आपको काम कितना आता है. यही वजह है कि स्किल-आधारित कोर्सेज की डिमांड बढ़ गई है.

डॉ. तान्या सिंह (डीन एकेडमिक्स, नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी) का मानना है कि इन कोर्सेज का मेन फोकस किताबी ज्ञान (थ्योरी) के बजाय प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर होता है. ये कोर्सेज कम समय में आपको इंडस्ट्री के लिए तैयार कर देते हैं. ये काफी फ्लेक्सिबल होते हैं और इन्हें कोई भी कहीं से भी कर सकता है. कंपनियां अब सिर्फ यह नहीं देखतीं कि आप किस कॉलेज से आए हैं, बल्कि यह देखती हैं कि आपके पास कौन सा सर्टिफिकेट है और आप कंपनी के काम में कितनी जल्दी हाथ बंटा सकते हैं.

क्या डिग्री अब बेकार है?

डॉ. तान्या सिंह आगे कहती हैं कि डिग्री की अपनी एक अलग अहमियत है. कॉलेज की पढ़ाई सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देती, बल्कि यह आपकी सोचने-समझने की क्षमता , नेटवर्किंग और पर्सनालिटी को निखारती है. आने वाले समय में डिग्री और छोटे-छोटे स्किल्स (माइक्रो-क्रेडेंशियल्स) दोनों साथ-साथ चलेंगे. यानी अगर आपके पास डिग्री और स्किल दोनों हैं, तो आपके लिए नौकरी पाना आसान हो जाएगा.

Advertisement
सिर्फ डिग्री अब सफलता की गारंटी नहीं

इस बहस पर न्यू दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (NDIM) के मैनेजिंग डायरेक्टर आयुष कुमार ने बहुत गहरी बात कही है. उनके मुताबिक, आज सवाल 'डिग्री बनाम स्किल्स' का नहीं, बल्कि 'प्रासांगिकता' का है.

आयुष कुमार कहते हैं, "डिग्री की वैल्यू खत्म नहीं हुई है, लेकिन सिर्फ डिग्री के भरोसे रहना अब समझदारी नहीं है. डिग्री आपके लिए नौकरी का दरवाजा तो खोल सकती है, लेकिन उस कमरे में टिके रहने और आगे बढ़ने के लिए स्किल्स ही आपकी असली ताकत बनेंगे." आज कंपनियां डिग्री के काग से ज्यादा उम्मीदवार की प्रॉब्लम सॉल्विंग क्षमता, डिजिटल समझ और नए माहौल में ढलने की काबिलियत को देख रही हैं. अब मूल्यांकन कागजों पर नहीं, बल्कि आपकी असली क्षमता पर हो रहा है.

Advertisement

डिग्री और स्किल एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं

वहीं, इस मुद्दे पर एनआईआईटी यूनिवर्सिटी के वाइस प्रेसिडेंट प्रो. परिमल मांडके का कहना है कि ट्रेडिशनल डिग्री आज भी अपनी मजबूत भूमिका निभाती है. यह गहराई से सोचने की क्षमता, आलोचनात्मक दृष्टि, अलग-अलग विषयों की समझ और लंबे समय तक पढ़ाई से मिलने वाली परिपक्वता देती है. ये सभी चीजें केवल छोटे समय के सर्टिफिकेट कोर्स से हासिल नहीं की जा सकतीं. लेकिन टेक्नोलॉजी की तेजी से बदलती दुनिया में यूनिवर्सिटी को अपने सिलेबस में नई स्किल्स को तेजी से शामिल करना होगा.

प्रो. परिमल आगे कहते हैं कि NIIT University में हम माइक्रो-क्रेडेंशियल्स और इंडस्ट्री सर्टिफिकेशन्स डिग्री का विकल्प नहीं, बल्कि उसके पूरक के रूप में देखते हैं. ये छात्रों को नए क्षेत्रों को समझने, अपने रुचि के विषय खोजने और करियर के संभावित विकल्पों को परखने का अवसर देते हैं. जब इन्हें मजबूत एकेडेमिक फ्रेमवर्क के साथ जोड़ा जाता है, तो ये शिक्षा को और अधिक प्रैक्टिकल और इफेक्टिव बनाते हैं.

उच्च शिक्षा का भविष्य इसी संतुलन में है, जहां अकादमिक मजबूती के साथ प्रोजेक्ट-आधारित सीख, इंडस्ट्री अनुभव और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान शामिल हो. अब समय आ गया है कि हायर एजुकेशन केवल डिग्री-सेंटर्ड न रहकर कैपेबिलिटी सेंटर्ड बने. जो संस्थान यह बदलाव अपनाएंगे, वे छात्रों को सिर्फ पहली नौकरी के लिए नहीं, बल्कि बदलती ग्लोबल इकोनॉमी में लंबे समय तक प्रासंगिक बने रहने के लिए तैयार करेंगे.

डिग्री और प्रैक्टिकल स्किल के बीच बदल रहा है रिलेशन

 मणिपाल एकेडमी ऑफ बीएफएसआई के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड आताश शाह का कहना है कि आज के तेजी से बदलते जॉब मार्केट में डिग्री और practical skills के बीच का संबंध एक फंडामेंटल चेंजेज से गुजर रहा है. हालांकि ट्रेडिशनल एजुकेशन का अपना महत्व बना हुआ है, लेकिन यह धारणा अब मान्य नहीं है कि केवल एक डिग्री ही  रोजगार के लिए तैयार कर देती है.

उन्होंने आगे कहा कि चूंकि तकनीक हर तिमाही में विकसित हो रही है, इसलिए प्रोफेशनल्स को रिलेवेंट बने रहने के लिए लगातार 'लर्न, अनलर्न और रीलर्न' (सीखना, पुरानी बातों को छोड़ना और फिर से नया सीखना) करना होगा. स्किल, विशेष रूप से एक्सपिरेयंसियल और एलिजिबिलिटी बेस्ड ट्रेनिंग, अब असली पहचान बन रहे हैं, जो व्यक्तियों को वास्तविक दुनिया के संदर्भों में ज्ञान को प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम बनाते हैं. आज की अर्थव्यवस्था में, डिग्री के साथ ऐसे कौशल का होना जरूरी है जो युवाओं को सशक्त बनाए और जॉब मार्केट की गतिशील मांगों को पूरा करने में मदद करे. 

Advertisement

युवाओं को क्या करना चाहिए?

इन बातों से यह निष्कर्ष निकलकर आता है कि शिक्षण संस्थानों को भी अब सिर्फ डिग्री देने के साथ-साथ उन्हें स्किल्ड भी करना होगा. अगर आप स्टूडेंट्स हैं, तो अपनी डिग्री पूरी करें लेकिन साथ ही साथ अपनी फील्ड से जुड़े नए स्किल्स भी सीखते रहें. मौजूदा समय में सफलता का मंत्र यही है डिग्री के साथ हुनर का होना.