Degrees vs Skills: क्या अब डिग्री की वैल्यू खत्म हो गई है? जानिए क्या है इसपर Expert की असली राय

एक समय था जब हाथ में डिग्री आते ही नौकरी पक्की मानी जाती थी, लेकिन अब हवा का रुख बदल चुका है. आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स से कि इस बदलते दौर में क्या वाकई डिग्री की वैल्यू खत्म हो गई है या फिर कहानी कुछ और है.

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एक्सपर्ट्स का मानना है कि डिग्री करियर का दरवाजा खोलती है, लेकिन सफलता के लिए प्रैक्टिकल स्किल्स जरूरी हैं.

Kya digree ki value khatm ho gayi hai: एक समय था जब हाथ में डिग्री आते ही नौकरी पक्की मानी जाती थी, लेकिन अब हवा का रुख बदल चुका है. आज के दौर में हर युवा के मन में एक ही सवाल है क्या सिर्फ डिग्री लेकर अच्छी नौकरी मिल जाएगी? या फिर कॉलेज की पढ़ाई छोड़कर सिर्फ कोई शॉर्ट-टर्म कोर्स या स्किल सीख लेना काफी है? इसी को लेकर हमने एक्सपर्ट्स से बात की क्या इस बदलते दौर में वाकई डिग्री की वैल्यू खत्म हो गई है या फिर कहानी कुछ और है? चलिए जानते हैं उनकी इसपर क्या राय है...

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स्किल बेस्ड कोर्सेज का बढ़ता क्रेज

आजकल टेक, डिजिटल मार्केटिंग, डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड इंडस्ट्री जैसी फील्ड्स में डिग्री से ज्यादा इस बात पर जोर दिया जाता है कि आपको काम कितना आता है. यही वजह है कि स्किल-आधारित कोर्सेज की डिमांड बढ़ गई है.

डॉ. तान्या सिंह (डीन एकेडमिक्स, नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी) का मानना है कि इन कोर्सेज का मेन फोकस किताबी ज्ञान (थ्योरी) के बजाय प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर होता है. ये कोर्सेज कम समय में आपको इंडस्ट्री के लिए तैयार कर देते हैं. ये काफी फ्लेक्सिबल होते हैं और इन्हें कोई भी कहीं से भी कर सकता है. कंपनियां अब सिर्फ यह नहीं देखतीं कि आप किस कॉलेज से आए हैं, बल्कि यह देखती हैं कि आपके पास कौन सा सर्टिफिकेट है और आप कंपनी के काम में कितनी जल्दी हाथ बंटा सकते हैं.

क्या डिग्री अब बेकार है?

डॉ. तान्या सिंह आगे कहती हैं कि डिग्री की अपनी एक अलग अहमियत है. कॉलेज की पढ़ाई सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देती, बल्कि यह आपकी सोचने-समझने की क्षमता , नेटवर्किंग और पर्सनालिटी को निखारती है. आने वाले समय में डिग्री और छोटे-छोटे स्किल्स (माइक्रो-क्रेडेंशियल्स) दोनों साथ-साथ चलेंगे. यानी अगर आपके पास डिग्री और स्किल दोनों हैं, तो आपके लिए नौकरी पाना आसान हो जाएगा.

सिर्फ डिग्री अब सफलता की गारंटी नहीं

इस बहस पर न्यू दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (NDIM) के मैनेजिंग डायरेक्टर आयुष कुमार ने बहुत गहरी बात कही है. उनके मुताबिक, आज सवाल 'डिग्री बनाम स्किल्स' का नहीं, बल्कि 'प्रासांगिकता' का है.

आयुष कुमार कहते हैं, "डिग्री की वैल्यू खत्म नहीं हुई है, लेकिन सिर्फ डिग्री के भरोसे रहना अब समझदारी नहीं है. डिग्री आपके लिए नौकरी का दरवाजा तो खोल सकती है, लेकिन उस कमरे में टिके रहने और आगे बढ़ने के लिए स्किल्स ही आपकी असली ताकत बनेंगे." आज कंपनियां डिग्री के काग से ज्यादा उम्मीदवार की प्रॉब्लम सॉल्विंग क्षमता, डिजिटल समझ और नए माहौल में ढलने की काबिलियत को देख रही हैं. अब मूल्यांकन कागजों पर नहीं, बल्कि आपकी असली क्षमता पर हो रहा है.

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युवाओं को क्या करना चाहिए?

इन बातों से यह निष्कर्ष निकलकर आता है कि शिक्षण संस्थानों को भी अब सिर्फ डिग्री देने के साथ-साथ उन्हें स्किल्ड भी करना होगा. अगर आप स्टूडेंट्स हैं, तो अपनी डिग्री पूरी करें लेकिन साथ ही साथ अपनी फील्ड से जुड़े नए स्किल्स भी सीखते रहें. मौजूदा समय में सफलता का मंत्र यही है डिग्री के साथ हुनर का होना.

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