CWTS Leiden Ranking 2025: दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी मानी जाने वाली हावर्ड यूनिवर्सिटी को बड़ा झटका लगा है. CWTS लीडेन रैंकिंग 2025 (साइंस कैटेगरी) में हार्वर्ड अब पहले या दूसरे नहीं, बल्कि तीसरे नंबर पर पहुंच गई है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार पहली और दूसरी पोजिशन चीन की यूनिवर्सिटीज झेजियांग (Zhejiang University) और शंघाई जिओ टोंग (Shanghai Jiao Tong University) ने अपने नाम किया है. इतना ही नहीं, टॉप 10 में तीसरे स्थान को छोड़कर बाकी 9 में से ज्यादातर पोजिशन चीनी यूनिवर्सिटीज के नाम हैं. यह साफ संकेत है कि ग्लोबल एजुकेशन और रिसर्च का केंद्र तेजी से अमेरिका से चीन की ओर शिफ्ट हो रहा है.
CWTS Leiden Ranking 2025 क्या है और क्यों इतना अहम
CWTS लीडेन रैंकिंग 2025 एक ग्लोबल ऑनलाइन रैंकिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी स्टडीज (CWTS) द्वारा तैयार किया जाता है. यह रैंकिंग 1,500 से ज्यादा प्रमुख यूनिवर्सिटीज के साइंटिफिक रिसर्च परफॉर्मेंस को मापती है. इस रैंकिंग की खासियत यह है कि यह पूरी तरह डेटा ड्रिवन होती है, वेब ऑफ साइंस डेटाबेस पर बेस्ड होती है. रिसर्च आउटपुट, क्वालिटी और इम्पैक्ट पर फोकस करती है. यही वजह है कि दुनियाभर की सरकारें, एजुकेशन एक्सपर्ट्स और स्टूडेंट्स इसे बेहद गंभीरता से लेते हैं.
कभी अमेरिका का था दबदबा
CWTS लीडेन रैंकिंग की शुरुआत 2006-2009 के डेटा से हुई थी. उस समय हावर्ड यूनिवर्सिटी नंबर 1 पर थी. टोरंटो यूनिवर्सिटी दूसरे और मिशिगन यूनिवर्सिटी तीसरे नंबर पर थी. टॉप 10 में ज्यादातर यूनिवर्सिटीज अमेरिका से थीं. यह वह दौर था जब ग्लोबल रिसर्च में US का एकतरफा दबदबा था.
एजुकेशन-रिसर्च को लेकर बदली तस्वीर
आज हालात बिल्कुल उलट हैं. 2006-2009 में टॉप 10 में शामिल अमेरिका की 6 बड़ी यूनिवर्सिटीज अब टॉप 15 में भी नहीं हैं, जिनमें मिशिगन यूनिवर्सिटी, UCLA, जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, वाशिंगटन यूनिवर्सिटी (Seattle), पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी शामिल हैं.
हार्वर्ड की रैंकिंग कब से गिरनी शुरू हुई
2019-2022 के दौरान पहली बार झेजियांग यूनिवर्सिटी ने हार्वर्ड को पीछे छोड़ा. 2020-2023 में हार्वर्ड सीधे तीसरी पोजिशन पर फिसल गई, जबकि 2018-2021 तक यह लगातार एक दशक से ज्यादा समय तक टॉप पर बनी हुई थी. CWTS लीडेन रैंकिंग 2025 साफ दिखाता है कि चीन ने रिसर्च फंडिंग में भारी निवेश किया, साइंस और टेक्नोलॉजी पर फोकस बढ़ाया, इंटरनेशनल कोलैबोरेशन को मजबूती दी, जिसका नतीजा आज ग्लोबल साइंस रैंकिंग पर चीन का वर्चस्व है.
भारतीय यूनिवर्सिटीज का परफॉर्मेंस कैसा है?
भारत के लिए राहत की बात यह है कि कुछ संस्थानों ने मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है. VIT (Vellore Institute of Technology) भारत में नंबर 1 है. इसके बाद IIT खड़गपुर, IIT दिल्ली, IIT बॉम्बे और IIT मद्रास का नंबर है. हालांकि, भारत अभी टॉप ग्लोबल पोजिशन से दूर है, लेकिन रिसर्च बेस लगातार मजबूत हो रहा है.
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