CUET या डायरेक्ट एडमिशन? 12वीं के बाद CBSE छात्रों के लिए क्या है बेस्ट ऑप्शन

CBSE 12वीं के बाद CUET और डायरेक्ट एडमिशन में से क्या चुनें? जानें दोनों के बीच का बड़ा अंतर और अपने करियर के लिए सही फैसला लेने के आसान टिप्स.

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जो छात्र प्राइवेट संस्थानों से प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते हैं या किसी खास वजह से एंट्रेंस एग्जाम नहीं देना चाहते, उनके लिए यह बेहतर विकल्प है.

CBSE 12वीं की परीक्षाएं खत्म होने के साथ ही छात्रों और अभिभावकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि कॉलेज में दाखिला कैसे लिया जाए CUET (Common University Entrance Test) या डायरेक्ट एडमिशन के जरिए? बता दें कि दोनों के अपने फायदे और नियम हैं, जिन्हें समझना आपके करियर के लिए बेहद जरूरी है. तो चलिए जानते हैं इन दोनों का अंतर और फायदे और आपके लिए क्या है बेस्ट.

CUET: बड़ी यूनिवर्सिटीज में एंट्री का रास्ता

अगर आपका सपना दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU), बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) या जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) जैसे देश के टॉप सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में पढ़ने का है, तो आपके लिए CUET पास करना जरूरी है.

मेरिट का आधार

यहां आपके 12वीं के मार्क्स सिर्फ एक पात्रता (Eligibility) हैं. असली मेरिट आपके CUET स्कोर से बनेगी.

फायदा

एक ही परीक्षा के जरिए आप देश के दर्जनों बड़े विश्वविद्यालयों के लिए आवेदन कर सकते हैं.

डायरेक्ट एडमिशन

अगर आप सीयूईटी पास नहीं कर पाते हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. कई प्राइवेट यूनिवर्सिटी और कुछ स्टेट कॉलेज आज भी 12वीं के अंकों के आधार पर सीधे एडमिशन देते हैं.

प्रोसेस

यह रास्ता सरल और तेज है. इसमें किसी नेशनल लेवल एंट्रेंस टेस्ट के दबाव की जरूरत नहीं होती.

किसके लिए है बेस्ट

जो छात्र प्राइवेट संस्थानों से प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते हैं या किसी खास वजह से एंट्रेंस एग्जाम नहीं देना चाहते, उनके लिए यह बेस्ट है.

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क्या है आपके लिए सही?

 अगर आप सरकारी यूनिवर्सिटी और कम फीस में क्वालिटी एजुकेशन चाहते हैं, तो CUET की तैयारी में जुट जाएं. वहीं, अगर आप समय बचाना चाहते हैं और किसी नामी प्राइवेट कॉलेज में सीट पक्की करना चाहते हैं, तो डायरेक्ट एडमिशन को चुन सकते हैं.

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