आजकल जिस तरह से AI का बोलबाला है, उसे देखते हुए कई स्कूल अपने सिलेबस में कोडिंग और डेटा साइंस को शामिल कर रहे हैं. जी हां, जो चीजें पहले हम कॉलेज में सीखते थे, वो अब बच्चे स्कूल में ही पढ़ रहे हैं. इसी को लेकर सोशल मीडिया पर निष्ठा सिंह नाम की महिला ने पोस्ट शेयर की जिसने इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है. निष्ठा तब हैरान रह गई जब उसने देखा कि उसकी सातवीं क्लास में पढ़ने वाली छोटी बहन को स्कूल में Python और AI सिखाया जा रहा है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बहन की वर्कशीट की फोटो शेयर करते हुए निष्ठा ने कैप्शन में लिखा, "मेरी बहन 7वीं क्लास में है और छात्रों को पायथन और एआई पढ़ाया जा रहा है. क्या यह बहुत जल्दी नहीं है?"
इस फोटो में देखा जा सकता है कि स्कूल के असाइनमेंट में बच्चों से कोडिंग के सवाल पूछे गए थे. सवालों में बच्चों को पायथन प्रोग्राम लिखने के लिए कहा गया था, जैसे:
- सर्कल का एरिया (Area) और परिधि (Circumference) निकालना.
- दो नंबरों को आपस में बदलना (Swap).
- किलोमीटर को मीटर में बदलना.
ताज्जुब की बात यह थी कि बच्ची ने अपने हाथों से इन मुश्किल कोडिंग क्वेश्चन के आंसर सही-सही लिखे थे.
सोशल मीडिया यूजर्स का क्या है कहना
इस पोस्ट के वायरल होते ही लोगों के कमेंट्स की बाढ़ आ गई. अब तक इसे 35,000 से ज्यादा लोग देख चुके हैं. कुछ लोग तो बच्चों पर बढ़ते पढ़ाई के बोझ को देखकर परेशान दिखे, तो कुछ ने इसे आज के समय की जरूरत बताया.
एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा- 7वीं क्लास में तो मुझे बस इतना पता था कि पायथन (Python) एक सांप का नाम है."
वहीं एक दूसरे यूजर ने तंज कसते हुए कहा- शायद इसलिए सिखा रहे हैं क्योंकि आजकल कंपनियां इंटर्नशिप के लिए भी 7 साल का एक्सपीरियंस मांगने लगी हैं.
वहीं, कुछ लोगों का मानना था कि इतनी छोटी उम्र में बच्चे इन चीजों को रट तो सकते हैं, लेकिन शायद गहराई से समझ नहीं पाएंगे.
क्या वाकई यह उम्र सही है?
बहस के दूसरी तरफ ऐसे लोग भी थे जो स्कूल के इस कदम की तारीफ कर रहे थे. एक यूजर ने लिखा, "कोडिंग सीखने के लिए यह सबसे अच्छी उम्र है, आगे चलकर उसे इसका बहुत फायदा मिलेगा." वहीं एक और व्यक्ति का कहना था कि जिस तेजी से टेक्नोलॉजी बदल रही है, बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करना जरूरी है.