3 साल तक नहीं दे पाएंगे एग्जाम, 10 लाख जुर्माना: भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने को लेकर ये राज्य सरकार हुई सख्त

विधेयक में यह भी प्रावधान है कि ऐसे मामलों की जांच उप पुलिस निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) से कम रैंक के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी. आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार जांच किसी केंद्रीय या राज्य एजेंसी को भी सौंप सकती है.

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भर्ती परीक्षा के दौरान नकल करने वालों पर नकेल कसने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने खासा तैयारी कर ली है. छत्तीसगढ़ विधानसभा में इसको लेकर एक विधेयक पारित किया गया है. जिसमें नकल करने वालों को सजा देना का प्रावधान भी शामिल है. भर्ती और व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए ‘छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक-2026' को शुक्रवार को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है. सदन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधेयक पेश किया, जिस पर चर्चा के बाद इसे मंजूरी दी गई. चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के समय भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं से युवाओं के सपनों को ठेस पहुंची.

उन्होंने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग से जुड़ी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा की जा रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून 'परीक्षा माफिया' के खिलाफ सख्त संदेश है और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी. साय ने कहा, “यह केवल अपराधियों को सजा देने का कानून नहीं, बल्कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने का प्रयास है.” विपक्ष के नेता चरण दास महंत ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि नकल और संगठित गड़बड़ियों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़े प्रावधान जरूरी हैं..

अधिकतम 3 वर्षों तक परीक्षा नहीं दे पाएं 

विधेयक में अभ्यर्थियों के लिए भी सख्त प्रावधान किए गए हैं. यदि कोई अभ्यर्थी दोषी पाया जाता है, तो उसका परिणाम रोका जाएगा और उसे न्यूनतम एक वर्ष से लेकर अधिकतम तीन वर्षों तक परीक्षा में बैठने से प्रतिबंधित किया जा सकता है.

10 साल की सजा का प्रावधान

अन्य दोषियों के लिए तीन से 10 वर्ष तक की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है. अगर किसी सेवा प्रदाता या संस्था की संलिप्तता पाई जाती है, तो उस पर एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और उसे कम से कम तीन वर्ष तक परीक्षा संचालन से प्रतिबंधित किया जाएगा. साथ ही, संबंधित अधिकारियों या प्रबंधन की सहमति से अपराध सिद्ध होने पर उन्हें भी तीन से 10 वर्ष तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.

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विधेयक में यह भी प्रावधान है कि ऐसे मामलों की जांच उप पुलिस निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) से कम रैंक के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी. आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार जांच किसी केंद्रीय या राज्य एजेंसी को भी सौंप सकती है.

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