पिता के 'पेपर लीक' कांड से लगा था परिवार पर दाग, बेटी ने 10वीं में 99% लाकर धोया 'कलंक'

पिता पेपर लीक मामले में जेल में, लेकिन बेटी ने हार नहीं मानी. जालोर की चंद्रिका विश्नोई ने RBSE 10वीं बोर्ड में 99% अंक लाकर सबको हैरान कर दिया है.

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चंद्रिका की इस जीत में उसके दादा पाबूराम विश्नोई की अहम भूमिका रही.

Rajasthan Board Result 2026 : राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के 10वीं के नतीजों ने इस बार केवल टॉपर्स की लिस्ट नहीं दी है, बल्कि समाज को एक कड़ा सबक दिया है. यह कहानी है जालोर जिले के चितलवाना उपखंड के एक छोटे से गांव 'परावा' की, जहां एक बेटी ने साबित कर दिया कि विरासत में मिली 'बदनामी' को अपनी मेहनत की स्याही से मिटाया जा सकता है. यह संघर्ष है चंद्रिका गोपालजी बिश्नोई सारण का, जिसने राजस्थान बोर्ड की 10वीं परीक्षा में 99 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जालोर जिले में प्रथम स्थान हासिल किया है. उसकी इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मेहनत और हौसले के दम पर भविष्य खुद लिखा जा सकता है.

पिता पर ‘पेपर लीक' का साया, फिर भी नहीं टूटी हिम्मत

चंद्रिका की सफलता इसलिए और भी खास बन जाती है क्योंकि उसके पिता गोपाल सारण इस समय पेपर लीक मामले में जेल में हैं. जानकारी के अनुसार, गोपाल सारण, जो पहले राजस्थान पुलिस में सब-इंस्पेक्टर रहे हैं, पर पेपर लीक माफिया के साथ मिलकर भर्ती परीक्षाओं में धांधली करने के आरोप लगे थे. वर्ष 2024 में एसओजी ने उन्हें अभ्यर्थियों को पेपर पढ़वाने के आरोप में गिरफ्तार किया था. इससे पहले वर्ष 2020 में पाली जिले में पदस्थापना के दौरान उन पर क्रूड ऑयल चोरी के आरोप भी लगे थे, जिसके बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था. इन सब परिस्थितियों के बावजूद चंद्रिका ने कभी अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया और विपरीत हालातों को अपनी ताकत बना लिया.

दो साल से स्कूल में आ रही है फर्स्ट

इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल परावा गांव बल्कि पूरे चितलवाना क्षेत्र और विद्यालय में खुशी की लहर दौड़ गई है. सिवाड़ा स्थित सनराइज पब्लिक स्कूल के प्रधानाध्यापक राम निवास मुढ़ ने बताया कि चंद्रिका ने 8वीं कक्षा में उनके विद्यालय में प्रवेश लिया था और तब से लगातार अपनी मेहनत और लगन के दम पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करती आ रही है.

पिछले दो वर्षों से वह विद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त करती रही है. उन्होंने कहा कि चंद्रिका शुरू से ही अनुशासित, लक्ष्य के प्रति समर्पित और मेहनती छात्रा रही है, जिसका परिणाम आज इस बड़ी सफलता के रूप में सामने आया है. 

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मां का मिला साथ

चंद्रिका का पारिवारिक वातावरण भी शिक्षा के प्रति प्रेरणादायक रहा है. उनके दादा पाबूराम सारण सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक हैं, जिससे घर में पढ़ाई का सकारात्मक माहौल बना रहा. उनकी माता इंदुबाला गृहिणी हैं, जो हमेशा बेटी को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रही हैं. परिवार में एक बहन और एक छोटा भाई रविंद्र है, जो वर्तमान में 8वीं कक्षा में अध्ययनरत है. चंद्रिका रोजाना परावा गांव से स्कूल बस के माध्यम से सिवाड़ा जाकर पढ़ाई करती थी और घर लौटकर नियमित रूप से सेल्फ स्टडी करती थी. उसकी निरंतर मेहनत, समय प्रबंधन और लक्ष्य के प्रति दृढ़ता ने उसे यह मुकाम दिलाया है.

किताब भी लिख चुकी हैं चंद्रिका

विशेष उपलब्धि यह भी है कि चंद्रिका ने एक वर्ष पूर्व “छू ले अब वो नभ, नभ दूर नहीं” नामक पुस्तक लिखी थी, जो उसके आत्मविश्वास, सपनों और सकारात्मक सोच को दर्शाती है. इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि उसकी बहुमुखी प्रतिभा को उजागर करती है. 

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चंद्रिका की इस सफलता पर गांववासियों, विद्यालय स्टाफ और क्षेत्र के लोगों ने गर्व व्यक्त करते हुए उसे बधाई दी है. परावा गांव में जश्न का माहौल है और हर कोई इस होनहार छात्रा के उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहा है.

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