CBSE का बड़ा ऐलान, अब स्कूलों में रटना बंद, बदलेगा पढ़ाई का पूरा अंदाज, देखें क्या है नई 'Skill Labs' पॉलिसी

NEP 2020 : सीबीएसई का यह कदम शिक्षा को सिर्फ किताबों से निकालकर असली दुनिया से जोड़ रहा है. ये स्किल लैब्स न सिर्फ बच्चों को स्मार्ट बनाएंगी, बल्कि भारत के भविष्य को भी आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगी.

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दुनिया बदल रही है और 2030 तक बिग डेटा और एआई जैसे क्षेत्रों में नौकरियों की भरमार होगी.

CBSE New Skill labs Policy : सीबीएसई (CBSE) अब पढ़ाई के तरीकों में एक बड़ा बदलाव ला रहा है. अब सीबीएसई किताबी और रट्टू ज्ञान के बजाय, प्रैक्टिकल नॉलेज पर फोकस कर रहा है. अब स्कूलों में ऐसी लैब्स होंगी जहां बच्चे सचमुच अपने हाथों से काम सीखेंगे. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत, CBSE ने सभी स्कूलों में 'कम्पोजिट स्किल लैब्स' (Composite Skill Labs) अनिवार्य कर दी हैं. यानी अब आपके बच्चे सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि ऐसी स्किल्स सीखेंगे जो उन्हें भविष्य के लिए तैयारी करेंगी.

क्या हैं ये कम्पोजिट स्किल लैब्स?

आसान शब्दों में कहें तो, ये लैब्स ऐसी जगह होंगी जहां स्टूडेंट्स को किताबी बातों का प्रैक्टिकल अनुभव मिलेगा. सीबीएसई चाहता है कि बच्चे स्कूल से ही मशीनों, टेक्नोलॉजी और इंसानी सेवाओं से जुड़ी स्किल्स सीखें. ये लैब्स दो तरह की हो सकती हैं:

पहली

या तो कक्षा 6 से 12 तक के लिए एक बड़ी 600 वर्ग फुट की लैब.

दूसरी

या फिर दो छोटी 400 वर्ग फुट की लैब्स - एक कक्षा 6-10 के लिए और दूसरी कक्षा 11-12 के लिए.

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ये लैब्स 22 अगस्त 2027 से सभी सीबीएसई स्कूलों में शुरू हो जाएंगी. यहां तक कि नए स्कूलों के लिए भी इन्हें अनिवार्य कर दिया गया है.

13_Circular_2026 by subhashinitripathi93

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क्या सीखेंगे बच्चे इन लैब्स में?

सीबीएसई ने तीन प्रमुख क्षेत्र चुने हैं जहां से स्कूल स्किल्स सिखाने के लिए विषय चुन सकते हैं:

जीवन और जीव - Life Forms

इसमें खेती, बागवानी, या स्वास्थ्य से जुड़ी स्किल्स हो सकती हैं.

मशीनें और सामग्री - Machines and Materials

इसमें कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, या मैकेनिक से जुड़े काम हो सकते हैं.

इंसानी सेवाएं - Human Services

इसमें हॉस्पिटैलिटी, टूरिज्म, या बैंकिंग जैसी सर्विसेज शामिल हो सकती हैं.

स्कूलों को सलाह दी गई है कि वे ऐसे विषय चुनें जो उनके आस-पास के माहौल और इंडस्ट्री से जुड़े हों, ताकि बच्चों को इंटर्नशिप और नौकरी के मौके आसानी से मिल सकें.

AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर भी है जोर

दुनिया बदल रही है और 2030 तक बिग डेटा और एआई जैसे क्षेत्रों में नौकरियों की भरमार होगी. इसे ध्यान में रखते हुए, सीबीएसई ने स्कूलों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भी ध्यान देने को कहा है. स्कूल्स चाहें तो अपनी मौजूदा अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL) का इस्तेमाल एआई सिखाने के लिए कर सकते हैं. इस पूरे बदलाव का मकसद सिर्फ नौकरी पाना नहीं, बल्कि बच्चों को एंटरप्रेन्योर (उद्यमी) बनाना भी है, ताकि वे दूसरों को रोजगार दे सकें.

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