CBSE करिकुलम में बड़ा बदलाव, अब क्लास 9 में मैथमेटिक्स और साइंस की दो स्तर पर होगी पढ़ाई

सीबीएसई ने सत्र 2026-27 में कई अहम बदलाव करने जा रहा है. सबसे बड़ा बदलाव कक्षा 9वीं के नए पाठ्यक्रम से जुड़ा हुआ है. दरअसल अब क्लास 9 के स्टूडेंट्स मैथ और साइंस दो लेवल पर पढ़ सकेंगे. एक कॉमन सिलेबस के साथ, एक एडवांस्ड लेवल भी ऑफर किया जाएगा. जो स्टूडेंट्स एडवांस्ड लेवल चुनेंगे, उन्हें 25 मार्क्स का एक्स्ट्रा एग्जाम देना होगा.

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बोर्ड ने 2026-27 से मौजूदा 'मैथमेटिक्स बेसिक' और 'स्टैंडर्ड' सिस्टम को बंद करने की भी घोषणा की है.

एनालिटिकल लर्निंग को मजबूत बनाने के मकसद से एक बड़े बदलाव के तहत, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने मैथमेटिक्स और साइंस के लिए दो-लेवल का स्ट्रक्चर पेश किया है. इसके तहत, 2026-27 के एकेडमी सेशन से, आम जरूरी एग्जाम के साथ-साथ एडवांस्ड और हाई-लेवल असेसमेंट के लिए भी जगह बनाई गई है.  यह कदम बोर्ड के क्लास 9 से 12 के लिए नए जारी किए गए करिकुलम के हिस्से के तौर पर आया है.

बदले हुए फ्रेमवर्क के तहत, सभी स्टूडेंट्स स्टैंडर्ड मैथ और साइंस पढ़ेंगे, जिसमें एक कॉमन सिलेबस होगा. ये पेपर 80 मार्क्स का होगा, जबकि परीक्षा 3 घंटे की होगी. इसके अलावा स्टूडेंट्स के पास ऑप्शन होगा की वो एडवांस्ड मैथ और एडवांस्ड साइंस का पेपर भी दे सकेंगे. ये वैकल्पिक पेपर 25 अंकों का होगा और इसकी अवधि 1 घंटे की होगी. एडवांस्ड मैथ और एडवांस्ड साइंस सब्जेक्ट उन स्टूडेंट्स के लिए तैयार किए गए हैं जो इन सब्जेक्ट्स की डिटेल्स को और ज़्यादा गहराई से समझना चाहते हैं. 

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किस हिसाब से दिए जाएंगे अंक

एडवांस्ड परीक्षा में 50% या उससे ज्यादा अंक लाने वाले छात्रों की मार्कशीट में एक नोट होगा, जिसमें एडवांस्ड स्तर को सफलतापूर्वक पूरा करने की जानकारी दी जाएगी. हालांकि, ये अंक कुल मिलाकर बने एग्रीगेट स्कोर में नहीं जोड़े जाएंगे. अगर कोई छात्र क्वालिफ़ाइंग सीमा को पूरा नहीं कर पाता है, तो एडवांस्ड स्तर का कोई जिक्र नहीं किया जाएगा. यह दो-स्तरीय ढांचा सिर्फ थ्योरी वाले हिस्से पर लागू होगा. कक्षा 10 में 20 अंकों के इंटरनल असेसमेंट में कोई बदलाव नहीं होगा.

बोर्ड ने 2026-27 से मौजूदा 'मैथमेटिक्स बेसिक' और 'स्टैंडर्ड' सिस्टम को बंद करने की भी घोषणा की है. हालांकि, 2026-27 सत्र में कक्षा 10 के छात्र मौजूदा योजना के तहत ही पढ़ाई जारी रखेंगे. CBSE ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई छात्र तीन अनिवार्य विषयों गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान में से किसी एक में फेल हो जाता है, लेकिन किसी वैकल्पिक विषय में पास हो जाता है, तो वो वैकल्पिक विषय को फेल होने वाले विषय से बदला जा सकता है.

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