CBSE New Initiative: देशभर के CBSE स्कूलों में अब बच्चों और बुजुर्गों के बीच इमोशनल कनेक्शन को स्ट्रॉन्ग बनाने के लिए एक नई पहल शुरू हो रही है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे दादा-दादी और नाना-नानी को स्कूल एक्टिविटीज में सक्रिय रूप से शामिल करें. इस कदम से बच्चे न सिर्फ संस्कार और मूल्यों को सीखेंगे, बल्कि मोबाइल और डिजिटल डिवाइसेस की लत से भी दूर रहेंगे.
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इस पहल से बच्चों और बुजुर्गों के बीच न सिर्फ भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होगा, बल्कि बच्चों में बुजुर्गों के लिए सम्मान और संवेदनशीलता भी डेवलप होगी. इंडिपेंडेंस डे, चिल्ड्रेन डे, रिपब्लिक डे और अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस (International Day of Older Persons) जैसे अवसरों पर दादा-दादी और नाना-नानी को स्कूल बुलाया जाएगा, ताकि वे बच्चों के साथ अपने एक्सपीरिएंस और कहानियां शेयर कर सकें. यह बच्चे और बुजुर्ग दोनों के लिए सीखने और जुड़ने का अनोखा मौका है.
मोबाइल से बनेगी दूरीआजकल बच्चे ज्यादातर समय मोबाइल, टैबलेट और वीडियो गेम्स में बिजी रहते हैं, जिससे वे फैमिली और घर के बुजुर्गों से दूर हो जाते हैं. CBSE की यह पहल बच्चों को स्क्रीन टाइम कम करने और रियल वर्ल्ड के एक्सपीरिएंस में शामिल होने का अवसर देती है. जब बच्चे दादा-दादी के साथ समय बिताएंगे, उनकी कहानियां सुनेंगे और पारंपरिक खेल खेलेंगे, तो वे स्वाभाविक रूप से मोबाइल और डिजिटल डिवाइसेस से दूरी बनाएंगे.
स्कूलों में ग्रैंडपैरेंट्स वाकथान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें बुजुर्ग और बच्चे साथ में टहल सकेंगे. इसके अलावा, स्कूल आर्ट एंड क्रॉफ्ट वर्कशॉप्स, कहानी सुनाने के सेशन और पारंपरिक खेल आयोजित कर सकते हैं. बुजुर्ग बच्चों को जिंदगी के एक्सपीरिएंस बताएंगे और उन्हें वास्तविक दुनिया के साथ जोड़ेंगे. इस तरह दोनों जेनरेशन के बीच कम्युनिकेशन और समझ बढ़ेगी.
बच्चों और बुजुर्गों को क्या फायदा होगाबच्चों के लिए यह पहल उनकी शिक्षा और सामाजिक विकास के लिए फायदेमंद होगी. उन्हें पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों की जानकारी मिलेगी और वे बुजुर्गों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता सीखेंगे. बुजुर्गों के लिए ये अकेलापन कम करने और समाज से जुड़े रहने का मौका है. वे पोते-पोतियों के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकेंगे और अपनी इंपॉर्टेंस का एहसास करा सकेंगे.