Board Exam Result 2026: 15 अप्रैल को CBSE 10वीं के रिजल्ट जारी किए गए. कई बच्चों के मार्क्स शानदार रहे, जबकि कुछ को कम नंबर मिले. अगर आपके बच्चे के नंबर उम्मीद से कम आए हैं, तो दिल छोटा करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. इतिहास गवाह है कि दुनिया के सबसे रईस और कामयाब लोगों की मार्कशीट कभी परफेक्ट नहीं थी. किसी ने स्कूल छोड़ा, तो कोई कॉलेज से बाहर कर दिया गया, लेकिन आज पूरी दुनिया उनके कदमों में है. आइए जानते हैं उन हस्तियों के बारे में जिन्होंने साबित किया कि डिग्री सिर्फ एक कागज का टुकड़ा है, असली ताकत आपके हुनर में है.
IPS आकाश कुल्हारी
राजस्थान के बीकानेर के रहने वाले आकाश कुल्हारी स्कूल के दिनों में पढ़ाई में काफी कमजोर थे. 10वीं में उनके सिर्फ 57% नंबर आए थे. हालत यह थी कि उनके खुद के स्कूल ने उन्हें 11वीं में एडमिशन देने से मना कर दिया, लेकिन आकाश ने हार नहीं मानी. उन्होंने मेहनत की और 2005 में अपने पहले ही प्रयास में UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास कर डाली. आज वे यूपी कैडर के एक जांबाज आईपीएस अफसर हैं.
बिल गेट्स
दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शुमार बिल गेट्स का दाखिला हार्वर्ड जैसी बड़ी यूनिवर्सिटी में हुआ था, लेकिन उनका मन कोडिंग और सॉफ्टवेयर में बसता था. उन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी ताकि वे माइक्रोसॉफ्ट बना सकें. आज दुनिया का हर दूसरा कंप्यूटर उन्हीं के बनाए सॉफ्टवेयर पर चलता है.
स्टीव जॉब्स
ऐपल फाउंडर स्टीव जॉब्स ने कॉलेज की पढ़ाई सिर्फ इसलिए छोड़ दी थी, क्योंकि उन्हें क्लास के विषय बहुत बोरिंग लगते थे. उन्होंने महसूस किया कि उनके माता-पिता की मेहनत की कमाई एक ऐसी शिक्षा पर खर्च हो रही है जिसका उनके जीवन में कोई मोल नहीं है. कॉलेज छोड़ने के बाद उन्होंने अपनी मर्जी की कैलीग्राफी क्लासेज लीं, जिसने आगे चलकर मैक कंप्यूटर के खूबसूरत फोंट्स को डिजाइन करने में उनकी मदद की. आज स्टीव जॉब्स को दुनिया के सबसे बड़े विजनरी के रूप में याद किया जाता है.
सचिन तेंदुलकर
भारत रत्न सचिन तेंदुलकर आज करोड़ों युवाओं के रोल मॉडल हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वे स्कूल के दिनों में सिर्फ 10वीं तक ही पढ़ पाए थे. क्रिकेट के प्रति उनकी दीवानगी इतनी ज्यादा थी कि उन्होंने पढ़ाई से ज्यादा मैदान पर पसीना बहाना बेहतर समझा. आज उनके नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में 100 शतक दर्ज हैं और उन्हें खेल की दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान मिला है. उन्होंने साबित किया कि अगर आपके पास हुनर है, तो डिग्रियां मायने नहीं रखतीं.
थॉमस एडिसन और अल्बर्ट आइंस्टाइन
साइंस की दुनिया के इन दो महान सितारों को बचपन में उनके टीचर्स ने 'मंदबुद्धि' बता दिया था. थॉमस एडिसन को स्कूल से यह कहकर निकाल दिया गया था कि वे कुछ नहीं सीख सकते, लेकिन उन्होंने अपनी मां की देखरेख में पढ़ाई की और बल्ब का आविष्कार किया. वहीं, अल्बर्ट आइंस्टाइन को बोलने में दिक्कत थी और वे पढ़ाई में बहुत कमजोर थे, लेकिन आगे चलकर उन्होंने 'थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी' दी और नोबेल पुरस्कार जीता.