Success Story: हिंदी मीडियम से पढ़े नीतीश ने BPSC में किया टॉप, अब UPSC से एक कदम दूर

BPSC Topper Success Story: BPSC में लगातार दो बार पास होने और टॉप करने के बाद भी नीतीश रुक नहीं रहे हैं. अब वो यूपीएससी के तमाम पड़ाव पार कर इंटरव्यू तक पहुंच चुके हैं. वो अपने जूनियर छात्रों को भी पढ़ाते हैं और लगातार टिप्स देते हैं.

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हिंदी मीडियम से पढ़े नीतीश अब यूपीएससी की कर रहे तैयारी

Success Story Bihar: नवादा के वारिसलीगंज प्रखंड के कुटरी गांव के नीतीश पाठक ने BPSC में लगातार दो बार सफलता हासिल की. 68वीं BPSC में उन्होंने 36वीं रैंक हासिल की और आरडीओ के पद पर चयन हुआ. इसके बाद 69वीं BPSC में सामान्य वर्ग में 13वीं रैंक हासिल की. इस बार उनका चयन सहायक निबंधक के पद पर हुआ. फिलहाल, वो नालंदा जिले के नूरसराय में आरडीओ के पद पर कार्यरत हैं. नीतीश की पढ़ाई हिंदी माध्यम से हुई है. 68वीं BPSC में वे हिंदी के टॉपर रहे. अब BPSC के बाद उनका फोकस UPSC पर है. नीतीश के अनुसार UPSC के चौथे प्रयास में वे मुख्य परीक्षा पास कर चुके हैं.

कुटरी गांव से शुरू हुई कहानी

नीतीश की कहानी किसी बड़े शहर या महंगे स्कूल से शुरू नहीं हुई. उनका बचपन बिहार के नवादा जिले के वारिसलीगंज प्रखंड के कुटरी गांव में बीता. उन्होंने कुटरी स्थित इंटर विद्यालय से मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद वारिसलीगंज के एसएन सिन्हा कॉलेज से वर्ष 2018 में पॉलिटिकल साइंस से स्नातक किया.

उनके पिता अश्विनी पाठक पूजा-पाठ कराने के साथ निजी कोचिंग में पढ़ाते हैं, जबकि मां बबिता देवी गृहिणी हैं. परिवार में पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ा माहौल रहा है. उनके बड़े भाई प्रिंस पाठक दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय में एएसओ के पद पर कार्यरत हैं, जबकि दूसरे भाई रॉबिन्स पाठक आयकर विभाग में स्टेनोग्राफर हैं. दोनों भाइयों का चयन एसएससी के माध्यम से हुआ है. ग्रेजुएशन के बाद नीतीश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली चले गए. वहां उन्होंने सिविल सर्विसेज की तैयारी कराने वाले दृष्टि इंस्टीट्यूट से जुड़कर अपनी तैयारी को आगे बढ़ाया.

पहले प्रयास में सफलता

नीतीश ने BPSC के पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की. 68वीं BPSC में 36वीं रैंक के साथ उनका चयन आरडीओ के पद पर हुआ. नौकरी मिलने के बाद भी उन्होंने तैयारी जारी रखी और 69वीं BPSC में 13वीं रैंक हासिल कर ली.

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नौकरी मिली, लेकिन लक्ष्य नहीं बदला

सरकारी नौकरी मिलने के बाद अक्सर अभ्यर्थी तैयारी रोक देते हैं, लेकिन नीतीश ने ऐसा नहीं किया. उन्होंने नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखी और दूसरी बार BPSC में पहले से बेहतर प्रदर्शन किया. उनका चयन असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर हुआ. उन्हें डीएसपी बनने का अवसर भी मिला था, लेकिन उन्होंने उस विकल्प को नहीं चुना. फिलहाल वे आरडीओ के पद पर नालंदा जिले के नूरसराय में कार्यरत हैं.

हिंदी को कमजोरी नहीं हथियार बनाया

नीतीश की सफलता का एक महत्वपूर्ण पहलू उनका हिंदी माध्यम से पढ़ना और तैयारी करना है. प्रतियोगी परीक्षाओं में अंग्रेजी माध्यम को लेकर कई विद्यार्थियों के मन में यह धारणा रहती है कि सफलता के लिए अंग्रेजी माध्यम जरूरी है. नीतीश की कहानी इससे अलग है. उन्होंने हिंदी माध्यम से तैयारी की और BPSC में बेहतर रैंक हासिल की. नीतीश ने NDTV से कहा कि उनका जोर भाषा से ज्यादा विषय को समझने पर रहा है. वे सिलेबस को आधार बनाकर तैयारी करने और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण करने को जरूरी मानते हैं.

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सफलता का राज क्या है?

नीतीश अपने अनुभव के आधार पर सेल्फ स्टडी को सफलता का सबसे बड़ा आधार मानते हैं. उनके मुताबिक, कोचिंग किसी अभ्यर्थी को दिशा दे सकती है, लेकिन परीक्षा में सफलता के लिए खुद पढ़ना और अपनी कमियों पर काम करना जरूरी है. उनकी तैयारी में सिलेबस, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र, नियमित अध्ययन और रिवीजन की अहम भूमिका रही है.

दूसरों को भी दे रहे टिप्स

हिंदी माध्यम से खुद सफलता हासिल करने के बाद नीतीश प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का भी मार्गदर्शन कर रहे हैं. वे टेलीग्राम चैनल और दूसरे माध्यमों से विद्यार्थियों को गाइड करते हैं. नीतीश के मुताबिक, करीब 6,500 छात्रों को वो गाइडेंस दे चुके हैं. 

उनके मार्गदर्शन से जुड़े छात्रों ने भी BPSC में हिंदी माध्यम से सफलता हासिल की है. 70वीं BPSC में राजू कुमार ने 72वीं रैंक हासिल की. वे पहले ग्रुप डी में कार्यरत थे और अब उनका चयन डीएसपी के पद पर हुआ है और वो ट्रेनिंग ले रहे हैं. इसी तरह सुदर्शन शर्मा ने 81वीं रैंक हासिल की और उनका चयन सीनियर डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ. खास बात यह है कि दोनों विद्यार्थियों ने हिंदी माध्यम से सफलता हासिल की.

BPSC के बाद अब UPSC की बारी

दो बार BPSC में सफलता मिलने के बाद अब नीतीश का लक्ष्य UPSC है. UPSC के चौथे प्रयास में वो मुख्य परीक्षा पास कर चुके हैं. कुटरी जैसे गांव से निकलकर राज्य की प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा में लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाले नीतीश अब UPSC की ओर बढ़ रहे हैं. उनकी कहानी का सबसे बड़ा संदेश है - सफलता मिलने के बाद रुक जाना आसान है, लेकिन खुद को बेहतर बनाने की लगातार कोशिश करना बड़ी बात है.

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