Asha Bhosle Educational Qualification: भारतीय संगीत जगत की सबसे चमकती आवाजों में से एक, दिग्गज गायिका आशा भोसले आज हमारे बीच नहीं रहीं. 92 वर्ष की आयु में उनके निधन की खबर ने पूरे देश को शोक में डुबो दिया है. आशा ताई न केवल एक असाधारण गायिका थीं, बल्कि संघर्ष और सफलता की एक ऐसी मिसाल थीं, जिसने आठ दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया.
अक्सर लोग जानना चाहते हैं कि अपनी आवाज से जादू बिखेरने वाली आशा भोंसले कितनी पढ़ी-लिखी थीं? आपको जानकर हैरानी होगी कि आशा जी ने कोई औपचारिक स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं की थी.
शिक्षा से ज्यादा संगीत को दिया महत्व
साल 1943 में, महज 10 साल की छोटी सी उम्र में उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और अपने परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए गायन और अभिनय की दुनिया में कदम रख दिया. उनके लिए संगीत ही उनका सबसे बड़ा स्कूल और रियाज ही उनकी शिक्षा बन गई. इसके बावजूद, उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए कई यूनिवर्सिटीज ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया, उन्हें अमरावती और जलगांव यूनिवर्सिटी से उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि मिली थी.
करियर की शुरुआत और सफलता का शिखर
आशा भोंसले ने 1950 में प्लेबैक सिंगिंग (पार्श्व गायन) की शुरुआत की. शुरुआती संघर्ष के बाद, 1950 के दशक के मध्य में 'परिणीता' (1953), 'बूट पॉलिश' (1954), 'सीआईडी' (1956) और 'नया दौर' (1957) जैसी फिल्मों से उन्हें बड़ी पहचान मिली.
1966 में फिल्म 'तीसरी मंजिल' में आर.डी. बर्मन के साथ उनके गानों ने संगीत की एक नई परिभाषा लिखी. 'पिया तू अब तो आजा' (कारवां) और 'ये मेरा दिल' (डॉन) जैसे गानों ने उन्हें वर्सटाइल सिंगर के रूप में स्थापित कर दिया. उन्होंने मीना कुमारी और मधुबाला से लेकर काजोल और उर्मिला मातोंडकर जैसी कई पीढ़ियों की अभिनेत्रियों के लिए अपनी आवाज दी.
रिकॉर्ड और सम्मान
- आशा जी ने अपने करियर में 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए. उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें:
- 1987 में 'मेरा कुछ सामान' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला.
- 2000 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया.
- 2008 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.
- इसके अलावा उन्होंने 7 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स भी अपने नाम किए.
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