मैं कोई अलग मिट्टी का नहीं बना...IAAS अधिकारी लोकेश दताल ने बताया सफलता का असली मंत्र

IAAS लोकेश दताल ने एक प्रेरणादायक वीडियो में बताया कि सफलता किसी विशेष प्रतिभा से नहीं, बल्कि हार न मानने की आदत से मिलती है. जानिए उत्तराखंड के दांतू गांव से निकलकर भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा तक पहुंचने वाले इस अधिकारी की सक्‍सेस स्‍टोरी.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
IAAS लोकेश दताल की सक्‍सेस स्‍टोरी
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा के अफसर लोकेश दताल ने सफलता का मूलमंत्र आदतों और निरंतर प्रयास को बताया है
  • लोकेश दताल ने कहा कि वे भी आम लोगों की तरह हैं, पर हार मानने के बजाय लगातार कोशिश करते हैं
  • उन्होंने 2016 की UPSC परीक्षा में 1055वीं रैंक हासिल की और 2017 बैच के IAAS अधिकारी हैं

 IAAS Lokesh Datal Success Story: भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा के अधिकारी लोकेश दताल ने अपनी जिंदगी की सच्चाई और सफलता का मूलमंत्र साझा किया है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि वह भी बाकी लोगों जैसे ही हैं, लेकिन उनकी कुछ आदतों ने उन्हें सफलता तक पहुंचाया. IAAS अधिकारी लोकेश दताल ने वीडियो में कहा, "बहुत लोग मुझे कहते हैं, 'सर, हमें आपके जैसा बनना है.' मैं कहता हूं, 'भाई, मैं भी तुम्हारे जैसा ही हूं.' मुझे भी सुबह उठने का मन नहीं करता. मेरा भी जिम स्किप करने का मन करता है. मेरा भी पढ़ने का मन नहीं करता था. मुझे भी फेलियर से डर लगता है. मुझे भी कभी-कभी लगता है कि शायद मुझसे नहीं हो पाएगा. मैं कोई अलग मिट्टी का नहीं बना हूं.

बस एक छोटा-सा फर्क है. जहां तुम थककर रुक जाते हो, मैं वहां थोड़ा और चल लेता हूं. जहां तुम फेलियर को अपनी किस्मत समझ लेते हो, वहां मैं उसे एक और प्रयास समझ लेता हूं. और जहां तुम खुद से कह देते हो कि, 'छोड़ यार, मुझसे नहीं होगा', मैं खुद से कहता हूं, 'एक बार और ट्राई कर लेते हैं ना.' बस इतना-सा फर्क है. मैं तुमसे बेहतर नहीं हूं, भाई. मैं जिंदगी में उस पॉइंट पर भी नहीं रुका, जहां अक्सर लोग हार मान लेते हैं. जो तेरा है, वो जाकर ले." 

लोकेश दताल कौन हैं?

लोकेश दताल भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा (IAAS) के वर्ष 2017 बैच के अधिकारी हैं. अप्रैल 2026 में उन्होंने प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), बिहार के कार्यालय में वरिष्ठ उप महालेखाकार (प्रशासन एवं जी.ई.) के पद पर कार्यभार ग्रहण किया.

Advertisement

लोकेश दताल उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भारत-चीन सीमा के पास स्थित दारमा घाटी के गांव दांतू के निवासी हैं. उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2016 में 1055वीं रैंक हासिल की थी. उनके पिता महेंद्र सिंह दताल मनोरंजन कर विभाग में डिप्टी कमिश्नर पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं. उनकी मां पार्वती दताल प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं.

लोकेश दताल स्कूल के समय से ही मेधावी छात्र रहे हैं. उन्होंने हर कक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की. उनकी शुरुआती पढ़ाई हल्द्वानी के सेंट थेरेसा स्कूल में हुई. इसके बाद उन्होंने रुद्रपुर के होली चाइल्ड स्कूल से इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की और एनआईटी कृष्णापल्ली, तमिलनाडु से बीटेक की डिग्री हासिल की.

Advertisement

लोकेश दताल उत्तराखंड और पंजाब में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं. उनकी कार्यशैली की खूब सराहना होती है. दताल की पहचान एक ईमानदार और कर्मठ अधिकारी के रूप में की जाती है.

यह भी पढ़ें- 'पंजाब को अच्छे IPS की जरूरत है', इसलिए MBBS के बाद गुरसिमरत सिंह ने 4 बार पास की UPSC 

Featured Video Of The Day
'मैं सरेंडर कर दूंगा', जमानत रद्द होने पर अनंत सिंह ने क्या कहा?
Topics mentioned in this article
IaaS
UPSC
Succes Story

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं