प्रसिद्ध साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार देने की घोषणा, जानिए उनके बारे में

Gyanpeeth Award: प्रसिद्ध साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है.

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नई दिल्ली:

Gyanpeeth Award: प्रसिद्ध साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को वर्ष 2024 के लिए 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है. भारतीय ज्ञानपीठ ने शनिवार को एक बयान में यह जानकारी दी. बयान के मुताबिक, शुक्ल को हिंदी साहित्य में उनके अद्वितीय योगदान, सृजनात्मकता और विशिष्ट लेखन शैली के लिए इस सम्मान के वास्ते चुना गया है. वह हिंदी के 12वें साहित्यकार हैं, जिन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया जा रहा है. शुक्ल छत्तीसगढ़ राज्य के ऐसे पहले लेखक हैं, जिन्हें इस सम्मान से नवाजा जाएगा.

ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा पर खुशी जताई 

शुक्ल (Vinod Kumar Shukla) ने उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार दिए जाने की घोषणा पर खुशी जताई और कहा कि उन्हें कभी नहीं लगा कि यह पुरस्कार मिलेगा. यह पूछे जाने पर कि ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किये जाने की घोषणा को वह किस रूप में देखते हैं, तो शुक्ल ने कहा, ‘‘यह भारत का, साहित्य का एक बहुत बड़ा पुरस्कार है. इतना बड़ा पुरस्कार मिलना यह मेरे लिए खुशी की बात है.''

‘पीटीआई वीडियो' और ‘पीटीआई-भाषा' से बातचीत के दौरान शुक्ल ने कहा, ‘‘मुझे कभी नहीं लगा कि मुझे यह पुरस्कार मिलेगा. पुरस्कार की तरफ मेरा ध्यान जाता ही नहीं. दूसरे मेरा ध्यान दिलाते हैं. दूसरे मुझसे , परिचर्चा में, बातचीत में, कहते थे कि अब आपको ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलना चाहिए, मैं उनको संकोच में जवाब दे नहीं पाता.''

उन्होंने कहा कि वह इस उम्र्र में भी लेखन के प्रति समर्पित हैं. उन्होंने कहा,''बहुत बड़ा लिखने की अब मेरी हिम्मत नहीं होती है. मुझे लगता है कि जो भी काम करूं इस उम्र में पूरा कर लूं. बच्चों के लिए छोटा-छोटा लिखता हूं और मुझे आसान सा आधार मिल गया है कि मैं इस तरह के छोटे-छोटे काम करता रहूं. बच्चों के लिए लिखना मुझे बड़ा अच्छा लगता है.''
बयान के मुताबिक, प्रसिद्ध कथाकार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रतिभा राय की अध्यक्षता में हुई प्रवर परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया.

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पहली कविता 1971 में ‘लगभग जयहिंद' थी

बैठक में चयन समिति के अन्य सदस्य के रूप में माधव कौशिक, दामोदर मावजो, प्रभा वर्मा और डॉ. अनामिका, डॉ ए. कृष्णा राव, प्रफुल्ल शिलेदार, जानकी प्रसाद शर्मा और ज्ञानपीठ के निदेशक मधुसूदन आनंद शामिल थे. लेखक, कवि और उपन्यासकार शुक्ल (88 वर्ष) की पहली कविता 1971 में ‘लगभग जयहिंद' शीर्षक से प्रकाशित हुई थी. उनके प्रमुख उपन्यासों में ‘नौकर की कमीज', ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी' और ‘खिलेगा तो देखेंगे' शामिल हैं.

शुक्ल के उपन्यास ‘नौकर की कमीज' पर प्रसिद्ध फिल्मकार मणि कौल ने 1999 में इसी नाम से एक फिल्म बनायी थी. उनका लेखन सरल भाषा, गहरी संवेदनशीलता और अद्वितीय शैली के लिये जाना जाता है.वह मुख्य रूप से हिंदी साहित्य में अपने प्रयोगधर्मी लेखन के लिये प्रसिद्ध हैं. शुक्ल को साहित्य अकादमी पुरस्कार और अन्य प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा जा चुका है.

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ज्ञानपीठ पुरस्कार देश का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है, जिसे भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्य रचने वाले रचनाकारों को प्रदान किया जाता है. इस पुरस्कार के तहत 11 लाख रुपये की राशि, वाग्देवी की कांस्य प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है. वर्ष 1961 में स्थापित ज्ञानपीठ पुरस्कार सबसे पहले मलयालम कवि जी. शंकर कुरुप को 1965 में उनके काव्य संग्रह ‘ओडक्कुझल' के लिए दिया गया था.

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