App पर उम्र की गलत जानकारी के आधार पर खोले गए बच्चों के अकाउंट बंद हो: सर्वेक्षण

एक सर्वेक्षण में अभिभावक इस बात के पक्ष में नजर आए कि ऐप के लिए यह अनिवार्य किया जाए कि वे उम्र की गलत जानकारी के आधार पर खोले गए बच्चों के अकाउंट को बंद करें.

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App पर उम्र की गलत जानकारी के आधार पर खोले गए बच्चों के अकाउंट बंद हो: सर्वेक्षण
नई दिल्ली:

डिजिटल युग में बच्चों को मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रखना बहुत मुश्किल हो रहा है. वहीं बच्चों द्वारा अपने उम्र की गलत जानकारी देकर धडल्ले से अकाउंट खोले जा रहे हैं. इसी पर किए गए एक सर्वेक्षण में अभिभावक इस बात के पक्ष में नजर आए कि ऐप के लिए यह अनिवार्य किया जाए कि वे उम्र की गलत जानकारी के आधार पर खोले गए बच्चों के अकाउंट को बंद कर दें या फिर इसे जारी रखने के लिए अभिभावकों से मार्गदर्शन लें. ऑनलाइन सर्वेक्षण कंपनी ‘लोकल सर्किल्स' ने बुधवार को यह जानकारी दी.

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वैसे डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम 2023 में ऑनलाइन मंचों के लिए (लॉगइन के सिलसिले में) बच्चों के डेटा को मंजूर करने से पूर्व उनकी आयु का सत्यापन और उनके माता-पिता की स्पष्ट सहमति लेना अनिवार्य किया गया है. सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ अभिभावकों का मानना ​​है कि कई बच्चों ने इन मंचों पर ‘साइन अप' (पंजीकरण) करते समय अपनी आयु गलत बताई है तथा अधिकतर मंचों पर कोई जांच-पड़ताल और संतुलन व्यवस्था न होने के कारण, वे उनपर ‘साइन अप' करने एवं उनका उपयोग करने में सक्षम हैं.

बंद हो बच्चों के अकाउंट

सर्वेक्षण में कहा गया है, ‘‘सर्वेक्षण में शामिल 88 प्रतिशत माता-पिता डीपीडीपी नियमों के पक्ष में थे, जिसके अनुसार विभिन्न मंच (सोशल मीडिया, ओटीटी, ऑनलाइन गेमिंग, आदि) गलत उम्र दर्शाने वाले नाबालिग खातों की पहचान करना चाहिए और सक्रिय रूप से या तो माता-पिता की सहमति लेना चाहिए या ऐसे खातों को बंद कर देना चाहिए.''

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आयु की पहचान वाली सामग्री 

सर्वेक्षण में 21,760 अभिभावकों की राय ली गयी जिनमें महज चार प्रतिशत ही उम्र सत्यापन के बिना ही मंचों का उपयोग जारी रखने के पक्ष में नजर आए. सर्वेक्षण में शामिल हुए 22,518 लोगों में से 58 प्रतिशत माता-पिता इस बात के पक्ष में थे कि इंटरनेट मंचों को आयु की पहचान करने के लिए देखी गई सामग्री के प्रकार, अपलोड की गई सामग्री, प्रोफाइल जानकारी, चित्र आदि पर निर्भर होना चाहिए. 

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सर्वेक्षण 27 दिसंबर से 23 फरवरी तक

यह सर्वेक्षण 27 दिसंबर से 23 फरवरी तक किया गया. इस दौरान देश के 349 जिलों के स्कूली बच्चों के अभिभावकों से 44,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं प्राप्त होने का दावा किया गया है.

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