यह ख़बर 01 फ़रवरी, 2013 को प्रकाशित हुई थी

हर महीने 40-50 पैसे बढ़ेंगे डीजल के दाम : वीरप्पा मोइली

खास बातें

  • पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा है कि डीजल के दाम हर महीने 40 से 50 पैसे प्रति लिटर बढ़ते रहेंगे। मोइली ने यह भी साफ किया कि अगले आदेश तक दाम बढ़ते रहेंगे।
नई दिल्ली:

डीजल की बिक्री पर सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे घाटे की भरपाई के लिए इसकी कीमतें हर माह 40 से 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ाई जाएंगी। देश में पेट्रोलियम उत्पादों में सबसे ज्यादा खपत डीजल की ही होती है।

पेट्रोलियम मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने पत्रकारों से कहा, आगे किसी अन्य आदेश तक तेल विपणन कंपनियां डीजल के दामों में हर माह 40-50 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर सकती हैं। उल्लेखनीय है कि सरकार ने डीजल की कीमतों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का निर्णय 17 जनवरी को ही ले लिया था। इस निर्णय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों डीजल की कीमतों में तब तक प्रतिमाह थोड़ी-थोड़ी वृद्धि करने की छूट दी गई है जब तक कि उनका घाटा पूरा न हो जाए। फिलहाल, डीजल पर उन्हें आयात मूल्य के हिसाब से 10.80 रुपये प्रति लिटर का घाटा हो रहा है। तेल कंपनियों ने 17 जनवरी को प्रति लिटर डीलर में 45 पैसे की बढ़ोतरी की थी। दिल्ली में इस समय डीजल का भाव 47.65 रुपये प्रति लिटर हो गया था। इसके साथ ही थोक ग्राहकों के लिए मूल्य वृद्धि दस रुपये प्रति लिटर की वृद्धि हो गई है।

मोइली ने बताया कि डीजल की कीमतों में प्रति माह मामूली बढ़ोतरी करने का निर्णय अगला आदेश जारी होने तक लागू रहेगा। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि तेल कंपनियां दोबारा कब डीजल की कीमतें बढ़ाएंगी। डीजल का दाम बढाने से इस कदम से सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी की करीब 12,907 करोड़ रुपये सालाना की बचत होगी। पर कुछ थोक ग्राहकों ने पेट्रोल पंपों से खुदरा ग्रहाकों की तरह डीजल खरीदने का निर्णय लिया है।

मोइली ने कहा, कि उन्होंने सुना है कि गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने कहा है कि उनके राज्य सड़क परिवहन निगम अब डीजल थोक में खरीदने के बजाय अपनी बसों के लिए तेल स्थानीय पेट्रोल पंपों से खरीदेंगे। फिलहाल ये निगम अपने निजी उपयोग के लिए सीधे तेल कंपनियों से ईंधन खरीदते हैं।

मोइली ने कहा, हमें इस मसले पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है। हमने भी यह बात सुनी है। हम इस पर गौर कर रहे हैं।

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उन्होंने ने बसों को पेट्रोलपंप से डीजल भरवाने के निर्देश देने के बजाय राज्य सरकारों को डीजल पर वैट और सेल्स टैक्स कम करना चाहिए, ताकि वह सस्ता हो सके।