विनोद खन्ना की पत्नी कविता का खुलासा, 'वह ओशो के माली थे'

विनोद खन्ना 2017 में इस दुनिया से चले गए, लेकिन उन्हें आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन एक्टर्स में से एक के तौर पर याद किया जाता है. एक्टर ने एक इंडस्ट्री को चौंका दिया था और आध्यात्मिक रास्ते पर चल पड़े थे.

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विनोद खन्ना ने इस वजह से करियर के पीक पर लिया संन्यास
नई दिल्ली:

विनोद खन्ना 2017 में इस दुनिया से चले गए, लेकिन उन्हें आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन एक्टर्स में से एक के तौर पर याद किया जाता है. अपनी वर्सेटाइल एक्टिंग स्किल्स और स्टाइल के लिए जाने जाने वाले इस एक्टर ने एक इंडस्ट्री को चौंका दिया था और आध्यात्मिक रास्ते पर चल पड़े थे. इस बारे में उनकी दूसरी पत्नी कविता खन्ना ने बताया कि किस वजह से दिवंगत एक्टर ने सब कुछ छोड़ दिया और आध्यात्मिक गुरु ओशो के कम्यून में शामिल हो गए. वह ओशो के आश्रम में पहले भारत में और फिर अमेरिका के ओरेगन में रहे. कविता खन्ना ने बताया कि उनके पति बचपन से ही आध्यात्म की ओर झुकाव रखते थे. उन्हें अपनी राह तब मिली, जब उन्होंने परमहंस योगानंद की 1946 की किताब, ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी पढ़ी, जिसे उन्होंने कॉलेज में पढ़ा था.

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अपने YouTube चैनल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कविता ने कहा, विनोद बचपन से ही बहुत आध्यात्मिक थे. जब वह 17 साल के थे तो उन्होंने ऑटोबायोग्राफी ऑफ योगी किताब खरीदी और उस समय, उन्होंने कहा कि उन्हें तब एहसास नहीं हुआ कि ओशो भी उसी समय उसी बुकस्टोर में थे." कविता के अनुसार विनोद की जिंदगी में टर्निंग पॉइंट तब आया, जब उन्हें परिवार में कई नुकसान हुए, जिसने उन्हें बहुत ज्यादा प्रभावित किया. उन्होंने कहा, "इस अविश्वसनीय भौतिक जीवन को छोड़ने का टर्निंग पॉइंट...जो प्यार और सफलता उन्हें मिली थी...वह तब आया, जब दो साल के अंदर परिवार में कई मौतें हुईं.  जब उनकी मां गुजरीं, तो वह ओशो के पास गए और संन्यास ले लिया. इस तरह उनकी आध्यात्मिक यात्रा शुरू हुई.

कविता ने फिर साफ किया कि भले ही कई लोग सोचते होंगे कि आध्यात्मिकता चुनना विनोद के लिए एक पलायन था, लेकिन यह अर्थ की तलाश थी. ओरेगन कम्यून में उनके बिल्कुल अलग जीवन के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया, “वह ओशो के माली थे. ओशो का घर प्राइवेट था और बहुत कम लोगों को वहां जाने की इजाजत थी, लेकिन माली के रूप में वह वहां रहे. वह उनकी सेवा थी." 

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उनकी पत्नी के अनुसार, विनोद आश्रम में रहने के दौरान ध्यान करते थे. “जब वह पुणे आश्रम जाने से पहले मुंबई में थे, तब भी बॉम्बे के चौपाटी बीच पर ध्यान करते थे, जो इस हलचल भरे शहर के ठीक बीच में है. सभी लोग अपने कपड़े उतार देते थे और वे समुद्र तट पर एक घेरे में नग्न होकर ध्यान करते थे." मुझे लगता है कि उनकी यात्रा प्रतिबद्धता और भक्ति के साथ एक आध्यात्मिक यात्रा थी."

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विनोद खन्ना की आध्यात्मिक यात्रा और मृत्यु

दिवंगत एक्टर 1975 में आध्यात्मिक गुरु ओशो के शिष्य बन गए और 1980 के दशक की शुरुआत में अमेरिका के ओरेगन में ओशो के धार्मिक समुदाय रजनीशपुरम चले गए. "स्वामी विनोद भारती" नाम से उन्होंने पांच साल तक आध्यात्मिक जीवन जिया, लेकिन आध्यात्मिकता के कॉन्सेप्ट से मोहभंग होने के बाद उन्होंने इसे छोड़ दिया. अप्रैल 2017 में ब्लैडर कैंसर की एडवांस स्टेज से जूझते हुए उनकी मृत्यु हो गई.

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