90 के दशक में बॉलीवुड की फिल्मों का एक तय फॉर्मूला हुआ करता था. हीरो, हीरोइन, एक विलेन, कुछ गलतफहमियां और आखिर में प्यार की जीत. दर्शक भी ऐसी कहानियों को खूब पसंद करते थे. लेकिन इसी दौर में एक ऐसी फिल्म आई, जिसने लोगों की सोच ही बदल दी. पूरी कहानी में शक कभी एक किरदार पर जाता, तो कभी दूसरे पर. हर सीन के साथ सस्पेंस और गहराता जाता, जबकि असली कातिल का नाम आखिरी पल तक छिपाकर रखा गया. कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आता है, जब पर्दे पर वह चेहरा सामने आया, जिस पर किसी ने शक तक नहीं किया था. हम बात कर रहे हैं बॉबी देओल की हिट फिल्मों में से एक 'गुप्त: द हिडन ट्रुथ' की.
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जब सस्पेंस ने बदल दिया बॉलीवुड का ट्रेंड
1997 में रिलीज हुई 'गुप्त: द हिडन ट्रुथ' बॉलीवुड सबसे फेमस साइकोलॉजिकल सस्पेंस थ्रिलर फिल्मों में गिनी जाती है. राजीव राय की डायरेक्शन में बनी इस फिल्म ने यह साबित किया कि हिंदी सिनेमा सिर्फ रोमांस और फैमिली ड्रामा तक सीमित नहीं है, बल्कि रहस्य और थ्रिल से भरपूर कहानियां भी दर्शकों को सीट से बांधे रख सकती हैं. करीब 9 करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 33 करोड़ रुपए का कारोबार किया, जो उस समय के हिसाब से बड़ी सफलता मानी गई.
दमदार स्टारकास्ट, लेकिन असली खेल कहानी का था
फिल्म में बॉबी देओल, काजोल, मनीषा कोइराला, परेश रावल, ओम पुरी और राज बब्बर जैसे कलाकार नजर आए. कहानी साहिल सिन्हा (बॉबी देओल) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिस पर अपने सौतेले पिता की हत्या का आरोप लग जाता है. जेल जाने के बाद एक-एक कर कई और हत्याएं होती हैं. हर बार शक किसी नए किरदार पर जाता है और दर्शक लगातार यही सोचते रहते हैं कि आखिर असली कातिल कौन है.
जिस पर सबसे ज्यादा भरोसा था, वही निकला कातिल
फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण इसका क्लाइमैक्स था. पूरी कहानी में ईशा (काजोल) साहिल का साथ देती नजर आती हैं. वह हर मुश्किल में उसके साथ खड़ी रहती हैं, इसलिए दर्शकों को उन पर शक करने की कोई वजह नहीं मिलती. लेकिन आखिरी कुछ मिनटों में जब यह खुलासा होता है कि ईशा ही सभी हत्याओं के पीछे की मास्टरमाइंड है, तो थिएटर में बैठे दर्शक हिल जाते हैं. उस दौर में किसी बड़ी हीरोइन का विलेन बनना बेहद नई बात थी और यही ट्विस्ट फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बन गया.
काजोल का नेगेटिव रोल बना इतिहास
काजोल उस समय रोमांटिक और चुलबुले रोल्स के लिए जानी जाती थीं. ऐसे में उनका एक जुनूनी, साइकोलॉजिकल और खतरनाक किरदार निभाना हर किसी के लिए चौंकाने वाला था. इस दमदार एक्टिंग के लिए काजोल को फिल्मफेयर अवॉर्ड में बेस्ट विलेन का अवार्ड मिला था. वह इस केटेगरी में सम्मान पाने वाली पहली महिला कलाकार बनीं. उनका यह किरदार आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार नेगेटिव रोल्स में गिना जाता है.
आज भी क्यों याद की जाती है 'गुप्त'?
'गुप्त' सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री नहीं थी, बल्कि ऐसी फिल्म थी जिसने दर्शकों को आखिरी दृश्य तक अनुमान लगाने पर मजबूर रखा. इसकी तेज रफ्तार कहानी, शानदार स्क्रीनप्ले, शानदार संगीत और क्लाइमैक्स ने इसे 90 के दशक की कल्ट फिल्मों की लिस्ट में शामिल कर दिया. आज भी जब बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन सस्पेंस थ्रिलर फिल्मों की बात होती है, तो 'गुप्त: द हिडन ट्रुथ' का नाम सबसे पहले लिया जाता है. यह फिल्म इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि जब कहानी में रहस्य, मजबूत एक्टिंग और दमदार ट्विस्ट का सही मेल हो, तो वह दशकों बाद भी दर्शकों के दिल और दिमाग पर अपनी छाप छोड़ सकती है.