उर्फी जावेद की बहन ने सुनाई गरीबी की दर्दनाक कहानी, फीस भरने के पैसे नहीं थे, खाना खरीदने के लिए बेचना पड़ा घर का सामान

डॉली जावेद ने पहली बार अपने संघर्षभरे बचपन का दर्द साझा किया. उन्होंने बताया कि फीस भरने के पैसे नहीं थे, मां को गहने और घर का सामान तक बेचना पड़ा. बाद में उर्फी जावेद और उरूसा की कमाई से परिवार की जिंदगी बदल गई.

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जब डॉली जावेद के घर खाने तक के पैसे नहीं थे
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उर्फी जावेद की बहन और कंटेंट क्रिएटर डॉली जावेद इन दिनों रियलिटी शो 'द अलायंस' से बाहर आने के बाद लगातार चर्चा में हैं. लेकिन इस बार वजह उनका कोई वीडियो या ग्लैमरस अंदाज नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी का वो दर्द है जिसे सुनकर हर कोई भावुक हो रहा है. डॉली ने पहली बार खुलकर बताया कि एक समय ऐसा भी था जब उनके परिवार के पास अगले दिन का खाना खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे. हालात इतने खराब हो गए थे कि मां को अपने गहने बेचने पड़े और बाद में घर के बेड और अलमारी तक बेचनी पड़ी. उन्होंने ये भी बताया कि पैसों की कमी की वजह से उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी.

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पिता के जाने के बाद बदल गई पूरी जिंदगी

डॉली ने बताया कि जब उनके पिता परिवार को छोड़कर चले गए, तब उनकी मां पर चारों बच्चों की जिम्मेदारी आ गई. घर चलाना हर दिन एक नई चुनौती बन गया. कई बार पूरा परिवार इस सोच में रहता था कि अगला खाना कहां से आएगा. उनकी मां हर मुश्किल का सामना अकेले करती रहीं.

100 रुपये भी नहीं होते थे

डॉली ने बताया कि कई बार घर में 100 रुपये तक नहीं होते थे. उनकी मां रो पड़ती थीं क्योंकि उन्हें समझ नहीं आता था कि बच्चों को खाना कैसे खिलाएं. सुबह की चाय के लिए दूध तक नहीं होता था. हर दिन पैसों की चिंता पूरे परिवार को परेशान करती थी. डॉली ने बताया कि कई बार घर में गैस सिलेंडर भरवाने के पैसे भी नहीं होते थे. ऐसे में खाना कैसे बनेगा, ये सबसे बड़ी चिंता रहती थी. बिजली का बिल भरना भी मुश्किल हो गया था. पैसों की कमी का असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ा और फीस नहीं भर पाने की वजह से उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा.

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मां ने गहने बेचे, फिर घर का सामान भी बिक गया

डॉली ने बताया कि उनकी मां ने सबसे पहले अपने सोने के गहने बेच दिए ताकि कुछ जरूरी खर्च पूरे हो सकें. लेकिन इससे भी हालात नहीं सुधरे. बिजली का बिल नहीं भर पाने पर कनेक्शन काटने की नौबत आ गई. मजबूरी इतनी बढ़ गई कि घर के बेड और अलमारी तक बेचनी पड़ी ताकि परिवार का पेट भर सके.

उर्फी और उरूसा बनीं परिवार की ताकत

डॉली ने बताया कि जब उनकी बहनें उर्फी जावेद और उरूसा जावेद कमाने लगीं, तब धीरे-धीरे घर की हालत बदलने शुरू हुए. दोनों की कमाई से परिवार संभला और मुश्किल दिनों से बाहर निकलने का रास्ता मिला. डॉली ने कहा कि सफलता मिलने के बाद भी उर्फी ने कभी उन्हें छोटा महसूस नहीं कराया और हमेशा पूरे परिवार का साथ दिया.

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